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रक्षाबंधन 2019: जानिए कब है राखी, भाई की कलाई पर इस शुभ मुहूर्त में बांधे रक्षा

ऐसे हुई थी रक्षाबंधन की शुरूआत, भाई की लम्बी उम्र के लिए बहने बांधती हैं राखी

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Rakshabandhan 2019

Rakshabandhan 2019

वाराणसी. सावन की शुरूआत होते ही सभी बहने अपने भाई के कलाई में राखी बांधने के लिए रक्षाबंधन का इंतजार करती हैं। रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह भाई-बहनों के प्रेम का पवित्र त्योहार है। इस बार यह त्योहार 15 अगस्त को मनाया जाएगा। यदि इसकी शुरुआत के बारे में देखें तो यह भाई-बहन का त्यौहार नहीं बल्कि विजय प्राप्ति के किया गया रक्षा बंधन है। भविष्य पुराण के अनुसार जो कथा मिलती है वह इस प्रकार है। वर्तमान में यह त्यौहार बहन-भाई के प्यार का पर्याय बन चुका है, कहा जा सकता है कि यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व है। एक ओर जहां भाई-बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन बहन को देता है, तो दूसरी ओर बहन भी भाई की लंबी उम्र के लिये उपवास रखती है।

यह है शुभ मुहूर्त
15 अगस्त को रक्षाबंधन अनुष्ठान का समय - 05:59 से 17:59 और शुभ मुहूर्त- 13:44 से 16:22 तक रहेगा। इस बार रक्षाबंधन का पर्व भद्रा के दोष से मुक्त है। खास बात यह भी है कि गुरुवार के दिन श्रवण नक्षत्र तथा सौभाग्य योग का संयोग कम ही बनता है। रक्षाबंधन के ठीक चार दिन पहले देव गुरु बृहस्पति मार्गी हो रहे हैं। मार्गी गुरु की साक्षी में इस प्रकार का पर्व काल शुभ माना गया है। इस दिन हयग्रीव जयंती भी है, साथ ही रात में 9.40 से पंचक की शुरुआत हो रही है।


रक्षाबंधन की शुरूआत
एक बार कृष्ण भगवान ने दुष्ट राजा शिशुपाल को मारा था। युद्ध के दौरान कृष्ण के बाएं हाथ की अंगुली से खून बह रहा था। इसे देखकर द्रौपदी बेहद दुखी हुईं और उन्होंने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर कृष्ण की अंगुली में बांधा जिससे उनका खून बहना बंद हो गया। तभी से कृष्ण ने द्रौपदी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया था। वर्षों बाद जब पांडव द्रौपदी को जुए में हार गए थे और भरी सभा में उनका चीरहरण हो रहा था तब कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई थी। तभी से रक्षाबंधन की शुरूआत हो गई।