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पत्रिका मुहिम- काशिराज परिवार का है महाभारतकालीन इतिहास फिर रामगर किला क्यों न हो पर्यटन कैलेंडर में

काशी और रामनगर को अलग करके नहीं देखा जा सकता। रामनगर का किला है धरोहर।

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रामनगर किले का मुख्य द्वार

रामनगर किले का मुख्य द्वार

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. काशी दुनिया की प्राचीनतम जीवंत नगरी है। महाभरत काल में भारत के समृद्ध जिलों में एक थी काशी। महाभारत की रचना करने वाले वेदब्यास का मंदिर यहां है। उसी महाभारत में उन्होंने काशी की चर्चा के दौरान लिखा है कि गंगा पुत्र भीष्म ने काशी नरेश की तीन पुत्रियों अंबा, अंबिके और अंबालिका का अपहरण कर उन्हें हस्तिनापुर ले गए। यही नहीं सूर्य पुत्र कर्ण ने दुर्योधन के लिए काशी की राजकुमारी का बलपूर्वक अपहरण किया था। इसी कारण से दोनों राज्यों के बीच शत्रुता पनपी। महाभारत के युद्ध में काशीराज ने पांडवों का साथ दिया था। ऐसे में इस किले को प्रदेश व देश के पर्यटन कैलेंडर में क्यों नहीं शामिल किया जा सकता। यह कहना है बनारस के लोगों का।

प्राचीन इतिहास की पुस्तकों में वर्णित है कि जब 18वीं शताब्दी में काशी स्वतंत्र राज्य बना तब यह भारत का प्रमुख व्यापारिक और धार्मिक केंद्र था। 1910 में ब्रितानी शासन ने वाराणसी को एक नया भारतीय राज्य बनाया और रामनगर को इसका मुख्यालय। काशी नरेश अभी भी रामनगर किले में रहते हैं। ये किला वाराणसी नगर के पूर्व में गंगा के तट पर बना है। रामनगर किले का निर्माण चुनार के बलुआ पत्थरों से हुआ है। इसमें मुगल स्थापत्य शैली का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। रामनगर का किला और इसका संग्रहालय ऐतिहासिक धरोहर रूप में संरक्षित हैं । यह 18वीं शताब्दी से ही काशी नरेश का आधिकारिक आवास हैं। आज भी काशी नरेश नगर के लोगों में सम्मानित हैं। काशी के प्रायः हर धार्मिक कार्यक्रमों में काशिराज परिवार के प्रतिनिधि स्वरूप कुंवर अनंत नारायण की उपस्थिति पदेन अध्यक्ष होती है। काशी की जनता के बीच यह मान्यता है कि काशिराज भगवान शिव के अवतार हैं। नरेश नगर के प्रमुख सांस्कृतिक संरक्षक एवं सभी बड़ी धार्मिक गतिविधियों के अभिन्न अंग रहे हैं।

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इस बाबत वाराणसी के पूर्व सांसद और प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष डॉ राजेश मिश्र कहते हैं कि वाराणसी हिंदुस्तान का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र है। प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में संपूर्ण काशी को महत्वपूर्ण स्थान मिलना चाहिए। वह कहते हैं कि रामनगर का किला तो भारत की धरोहर है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के गोरक्षमंदिर को तो प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में शामिल करा लिया। अच्छी बात है, लेकिन इससे उसकी महत्ता बढ़ेगी, देश विदेश के लोग उस मंदिर को जानेंगे। लोग वहां जाएंगे तो गोरखपुर के एक नए पर्यटन केंद्र से परिचित होंगे। गोरखपुर के राजस्व में वृद्धि होगी, अभी तक तो नाथ संप्रदाय के लोग या मंदिर व महंत के अनुयायी ही उससे परिचित थे। लेकिन अगर गोरखपुर की ही बात की जाए तो वहां एक बड़ी झील है जिसे पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने आकर्षक स्वरूप प्रदान किया।, उसे भी शामिल करते। लेकिन नहीं, वह तो पर्यटन क्षेत्र के नाम पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे। यह उनकी छोटी सोच है। दरअसल योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार का कोई विजन ही नहीं है। ये केवल सांप्रदायिक व धार्मिक विभेद पैदा करने में जुटे हैं। डा. मिश्र ने कहा कि रामनगर किले के पास बालू का पहाड़ खड़ा होता जा रहा है। उसकी ओर किसी का ध्यान नहीं। बस जल परिवहन के लिए टर्मिनल निर्माण की योजना बना दी गई। कांग्रेस नेता ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को चाहिए कि वह रामनगर के किले को न केवल पर्यटन मानचित्र में यथोचित स्थान दें बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए भी योजना बनाएं। ऐसा न हो कि गंगा के कटान और अन्य कारणों से इस धरोहर को नुकसान पहुंचे। उन्होंने केंद्र के महत्वाकांक्षी जल परिवहन परियोजना के तहत रामनगर में निर्माणाधीन बहु उद्देशीय व बहुमंजिले टर्मिनल के स्थान परिवर्तन की भी सलाह दी।

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