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रंगभरी एकादशी: बाबा विश्वनाथ के लिए अकबरी पगड़ी बना रहा मुस्लिम परिवार, 5 पीढ़ियों से कर रहे सेवा

Rangbhari Ekadashi: रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ जब ससुराल जाते हैं, तो एक खास पगड़ी उनके सिर पर होती है।

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पगड़ी तैयार करते गियासुदीन (बायें)

वाराणसी में महाशिवरात्रि के बाद रंगभरी एकादशी का सबको इंतजार रहता है। महाशिवरात्रि पर भगवान भोले का विवाह होता है तो रंगभरी एकादशी के दिन माता पार्वती का गौना होता है, यानी वो मायके से ससुराल जाती हैं। उनको लेने बाबा विश्वनाथ जाते हैं तो उनके लिए एक खास ड्रेस और पगड़ी तैयार होती है।

बाबा विश्वनाथ इस साल जब मां पार्वती को लेने जब ससुराल यानी महंत आवास जाएंगे तो उनके सिर पर जो पगड़ी होगी, उस पगड़ी का नाम अकबरी पगड़ी है। बाबा विश्वनाथ के लिए अकबरी पगड़ी गयासुदीन तैयार कर रहे हैं। ये कोई पहली बार नहीं है, जब ग्यासुदीन ऐसा कर रहे हैं। उनका परिवार 5 पीढ़ियों, करीब 250 साल से ज्यादा से बाबा विश्वनाथ के लिए पगड़ी तैयार कर रहा है।

गयासुदीन के परदादा ने पहली बार बनाई थी पगड़ी
काशी के लल्लापुरा में रहने वाले गयासुदीन का कहना है कि 250 साल पहले उनके परदादा ने पहली बार बाबा विश्नाथ के ससुराल जाने के लिए उनकी पगड़ी बनाई थी। इसके बाद उनके दादा, पिता और वो भी इस परंपरा को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समय वो अकबरी पगड़ी बनाने में जुटे हैं।


पगड़ी तैयार करने के लिए नहीं लेते कोई पैसा

गयासुदीन का कहना है कि इस पगड़ी को तैयार करने में उनको करीब एक हफ्ते का वक्त लगता है। इतना वक्त लगने की वजह ये है कि वो इसमें जरी की खास किस्म की कढ़ाई कर रहे हैं। पगड़ी में कई तरह के मोती और धागे इस्तेमाल हो रहे हैं।

गयासुदीन कहते हैं कि उनका परिवार इस पगड़ी के लिए कोई पैसा नहीं लेता है। वो कहते हैं कि हिन्दू हो या मुसलमान, काशी के हर शख्स के दिल में बाबा विश्वनाथ के लिए खास श्रद्धाभाव है। इसी भाव से वो भी पगड़ी तैयार करते हैं। वो कहते हैं कि उनके हाथों की पगड़ी बाबा विश्वनाथ के सिर पर हो, इससे बड़ा इनाम कोई नहीं हो सकता है।

मां पार्वती के गौने से ही शुरू होती है होली
इस साल रंगभरी एकादशी 3 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन बाबा विश्वनाथ पालकी पर सवार होकर मां गौरा का गौना कराने ससुराल जाएंगे। बाबा विश्वनाथ के साथ माता पार्वती के गौने की रस्म के साथ ही वाराणसी में होली की शुरुआत भी मानी जाती है।

रंगभरी एकादशी को काशी के लोग बाबा विश्वनाथ और माता गौरा संग जमकर होली खेलते हैं। रंगभरी एकादशी के दिन से शुरू होकर 6 दिन तक वाराणसी में होली चलती है। बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती के गौने की परंपरा काशी में करीब 350 सालों से हो रही है।

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ऐसी धार्मिक मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर उनको गुलाल लगाना पति-पत्नी के जीवन में सुख लाता है। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन की परेशानियां कम हो जाती हैं।