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Rangbhari Ekadashi: 151 किलो गुलाब के अबीर से बाबा भक्तों संग खेलेंगे होली, कल से शुरू होंगे आयोजन

काशी में रंगभरी एकादशी 24 मार्च को, मथुरा से मंगाया गया है गुलाब से बना खास अबीर 24 मार्च को होगी बाबा के गवने की रस्म, 21 मार्च से होंगे रस्म के पहले होने वाले लोकाचार

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Rangbhari Ekadashi

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क

वाराणसी. आगामी 24 मार्च को रंगभरी एकादशी धूमधाम से मनायी जाएगी। उस दिन पुराधिपति बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों संग होली खेलेंगे। यह होली विशेष प्रकार के अबीर से खेली जाएगी जो गुलाब की पंखुड़ियों से तैयार किया जाता है। इस बार की रंगभरी एकादशी हर बार से अलग होगी। पहले इस मौके पर 51 किलो हर्बल अबीर से होली खेली जाती थी, लेकिन इस बार रंगभरी एकादशी पर बाबा संग होली खेलने के लिये मथुरा से खासतौर से गुलाब से बना 151 किलो अबीर मंगाया जा रहा है। 24 मार्च को बाबा के गवने की रस्म के पहले होने वाले लोकाचार की शुरुआत 21 मार्च यानि से हो जाएगी। काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत का टेढ़ी नीम स्थित आवास गौरा के मायके में तब्दील हो जाएगा। बाबा के गवने का उत्सव अगले चार दिनों तक चलेगा। 24 मार्च को महाआरती सूबे के धर्मार्थ कार्य संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री डाॅ. नीलकंठ तिवारी करेंगे। अबकी बार उत्सव का 357वां वर्ष है।


महंत डा. कुलपति तिवारी के मुताबिक 21 मार्च यानि रविवार को गीत गवना, 22 मार्च को गौरा का तेल-हल्दी होगा। 23 मार्च को बाबा का ससुराल आगमन होगा। बाबा के ससुराल आगमन के अवसर पर विश्वनाथ मंदिर महंत परिवार के सदस्य ज्योति शंकर त्रिपाठी (शिवाचार्य) व शंकर त्रिपाठी ‘धन्नी महाराज’ के सयुक्त आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा स्वतिवाचन, वैदिक घनपाठ और दीक्षित मंत्रों से बाबा की आराधना कर उन्हें रजत सिंहासन पर विराजमान कराया जाएगा। सभी धार्मिक अनुष्ठान अंकशास्त्री पं. वाचस्पति तिवारी के संयोजकत्व में परिवार के सदस्य करेंगे।


24 मार्च को मुख्य अनुष्ठान की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में होगी। भोर में चार बजे 11 ब्राह्मणों द्वारा बाबा का रुद्राभिषेक और सुबह छह बजे बाबा को पंचगव्य से स्नान कराया जाएगा। साढ़े छह बजे बाबा का षोडषोपचार पूजन और सुबह सात से नौ बजे तक महंत परिवार के सदस्यों द्वारा लोकाचार किया जाएगा। नौ बजे से बाबा का शृंगार आरंभ होगा। बाबा की आंखों में लगाने के लिए काजल, विश्वनाथ मंदिर के खप्पड़ से लाया जाएगा। गौर के माथे पर सजाने के लिए सिंदूर परंपरानुसार अन्नपूर्णा मंदिर के मुख्य विग्रह से लाया जाएगा। टेढ़ीनीम स्थित नवीन महंत आवास के भूतल स्थित हॉल में बाबा को विराजमान कराया जाएगा। सुबह 11:30 बजे भोग और महाआरती होगी। मंत्री नीलकंठ तिवारी बाबा की आरती करेंगे।


इस मौके पर 'शिवांजलि महोत्सव' का आयोजन होगा, जिसका उद्घाटन विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष, ध्रुपद-ख्याल गायक एवं विश्वविख्यात जलतरंग वादक पद्मश्री डा. राजेश्वर आचार्य पूर्वाह्न 10:30 बजे करेंगे। 24 मार्च को पूर्वाह्न साढ़े दस बजे से शाम साढ़े चार बजे तक काशी समेत देश के जाने माने कलाकारों द्वारा भगवान शिव पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘शिवांजलि’ का आयोजन होगा। इस साल काशी के रुद्रनाद बैंड के कलाकार गायन, वादन और नृत्य की प्रस्तुतियां देंगे। रुद्रनाद बैंड की ओर से शिव को समर्पित गीत भी मंच से रिलीज किये जाएंगे।


357 वर्षों के इतिहास में यह दूसरा मौका है जब बाबा की पालकी को मंदिर तक पहुंचाने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक दूरी तय करनी होगी। पहले मंदिर और महंत आवास आमने-सामने होने के चलते मात्र महज 25 से 30 कदम चलना होता था। बीते साल से टेढ़ीनीम से साक्षी विनायक, कोतलवालपुरा, ढुंढिराज गणेश, अन्नपूर्णा मंदिर होते हुए बाबा की पालकी मुख्य द्वार से विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश करने लगी है। यह दूरी कम से कम साढ़े चार सौ मीटर होगी। यही वजह है कि पहले जहां 51 किलो अबीर मंगाया जाता था वहीं इस बार 151 किलो गुलाब से बना अबीर मथुरा से मंगाया जा रहा है। पालकी यात्रा में डमरूदल और शंखनाद करने वाले 108 सदस्य भी शामिल होंगे। नादस्वरम् और बंगाल का ढाक भी बाबा की पालकी यात्रा में गूंजेंगे।