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RTI में सूचना छिपाने पर काशी विद्यापीठ की कुलसचिव पर लगा 25 हजार का जुर्माना

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की कुलसचिव पर राज्य सूचना आयोग ने 25 हजार का जुर्माना लगाया है। RTI के तहत सूचना छिपाने की कुलसचिव दोषी पाई गई हैं।

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Registrar of Kashi Vidyapeeth fined 25000 for hiding information in RTI

Varanasi News

वाराणसी। सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत मांगी गई सूचना न देने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की कुलसचिव को महंगा पड़ गया है। राज्य सूचना आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच की तो कुलसचिव दोषी निकलीं जिसके बाद उनपर 25 हजार का जुर्माना लगाया है। डॉ सुनीता पांडेय से यह जुर्माना उनकी सैलेरी से वसूला जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी को भी सूचना आयोग की तरफ से लेटर भेजा गया है।

20 फरवरी को मांगी गई थी सूचना

राज्य सूचना आयोग के अनुसार डॉ शिवेश कुमार पांडेय ने 20 फरवरी 2023 को जन सूचना अधिकारी काशी विद्यापीठ से सूचना मांगी थी। सूचना एक माह में नहीं मिले पर उन्होंने प्रथम अपील की थी। इसके बाद भी आवेदक को सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसपर आवेदक ने जन सूचनाधिकारी काशी विद्यापीठ के खिलाफ आयोग के सामने द्वितिय अपील 18 मई को दर्ज कराई थी।

31 जुलाई को खुल गया राज

राज्य सूचना आयोग ने इस मामले की सुनवाई 31 जुलाई 2023 को की तो पता चला की आवेदक को अभी तक सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसपर आयोग ने एक लेटर लिखकर जन सूचनाधिकारी को आयोग में उपस्थित होकर अपना रखने को कहा। इसपर काशी विद्यापीठ की कुलसचिव/ मुख्य सूचनाधिकारी की तरफ से अधिनियम की धारा 8 (1) का हवाला देते हुए सूचना देने से इंकार कर दिया। इसपर आयोग ने जांच की तो यह एप्लिकेशन इस धारा का उल्लंघन करती नहीं दिखाई दी।

सूचनाधिकारी कर रहीं हैं सूचना छिपाने का कार्य

इसपर जब जांच हुई तो यह सामने आया कि सूचनाधिकारी डॉ सुनीता पांडेय सूचनाओं को छिपा रहीं हैं और सूचना देने में बाधा पहुंचा रही हैं। उनके द्वारा आयोग के आदेश को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। सूचना के अधिकार अधिनियम के अनुसार सूचना मांगने वाले को 30 दिन में सूचना उपलब्ध करानी थी पर उन्होंने 6 महीने में कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई ऐसे में उनके ऊपर जुर्माना लगाया गया है।