
प्रख्यात संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा का निधन , शोक में डूबी काशी
वाराणसी. प्रख्यात संतूर वादक (Santoor player) पंडित शिवकुमार शर्मा का मंगलवार की सुबह मुंबई में निधन हो गया। वो विगत करीब 8-9 महीने से अस्वस्थ चल रहे थे। लेकिन घरवालों ने इसका तनिक भी प्रचार प्रसार नहीं किया। पडिंत जी भी न किसी से मिल रहे थे न बातचीत कर रहे थे। इस बीच आज सुबह उनके तिरोधान की सूचना से समूची दुनिया के संगीत प्रेमी स्तब्ध रह गए। खास तौर पर बनारस के संगीत प्रेमी और संगीतज्ञों पर मानों वज्रपात ही हो गया। इसकी खास वजह ये कि पंडित जी का बनारस घराने से गहरा लगाव रहा। ये लगाव पारिवारिक रहा। उन्होंने बनारस में कई मौकों पर मंच से ये स्वीकार किया कि बनारस तो उनका घर है।
मैने तो बड़े भाई को खो दिया
विख्यात शास्त्रीय गायक पंडित साजन मिश्र ने पत्रिका से खास बातचीत में रुंधे गले से कहा, मैनें तो अपना सगा बड़ा भाई ही खो दिया। इस एक साल के भीतर भारतीय संगीत के जाने कितने सितारे एक-एक कर चले गए। सबसे पहले मेरे सगे बड़े भाई पंडित राजन मिश्र का जाना हुआ। उस सदमे से अभी उबर भी नहीं पाया था पूरी तरह कि हम दोनों (राजन-साजन मिश्र) के बड़े भाई समान पंडित शिव कुमार शर्मा का चले जाना और भी दुखी कर गया।
पडिंत जी का बनारस घराना और मेरे परिवार से था गहरा लगाव
पंडित साजन मिश्र ने कहा कि पंडित शिव कुमार शर्मा के पिता पं. उमादत्त शर्मा, बनारस घराने के बड़े रामदास जी के शिष्य रहे। उन्होंने ही पं. शिवकुमार को वादन व गायन की प्राथमिक शिक्षा दी। इस गुरु-शिष्य परंपरा को सिर माथे लगाते पं. शिवकुमार मंच से भी कहते न थकते थे कि मैं भी बनारस घराने से ताल्लुक रखता हूं। जहां तक मेरा सवाल है तो वो हम दोनों भाइयों के अग्रज रहे। लिहाजा मेरे लिए तो ये व्यक्तिगत क्षति है।
हिप रिप्लेसमेंट हुआ था, चल रहा था इलाज
पंडित साजन मिश्र ने बताया कि पंडित शिवकुमार शर्मा का हिप रिप्लेसमेंट हुआ था। इसके चलते विगत 8-9 महीने से वो किसी से मुलाकात, बातचीत नहीं कर रहे थे। यहां तक कि अपने शिष्यों से भी दूरी बना ली थी। घर वालों ने भी इसका प्रचार प्रसार नहीं किया। लिहाजा कम लोगों को पता है कि वो हाल के महीनों में संगीत कार्यक्रमों से क्यों दूर रहे।
बहुत बड़े कलाकार रहे
पं मिश्र ने कहा कि वो बहुत बड़े कलाकार रहे। संतूर को उन्होंने पहली बार दुनिया के संगीत क्षितिज पर पेश किया, न केवल पेश किया बल्कि उसे स्थापित कर दिया। ऐसे महान कलाकार युगों में जन्म लेते हैं। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि पंडित जी को अपने श्री चरणों में स्थान दें और पूरे परिवार को इस दारुण दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
पुरानी परंपरा का पालन करते हुए नए प्रयोग किए
शास्त्रीय संगीत के महान गायक उत्तर प्रदेश संगीत अकादमी के अध्यक्ष पंडित राजेश्वर आचार्य ने पत्रिका को बताया कि पंडित शिव कुमार शर्मा संगीत की पुरानी परंपरा का पालन करते हुए नए प्रयोग किए। दरअसल शुरूआती दिनों में वो कुशल तबला वादक भी रहे। लिहाजा लय व ताल दोनों में खूबसूरत समन्वय स्थापित कर लेते रहे।
शाततंत्रीय वीणा को संतूर में तब्दील किया
राजेश्वर आचार्य ने बताया कि वो पंडित शिवकुमार शर्मा ही रहे जिन्होंने पहली बार शततंत्रीय वीणा को संतुर में तब्दील कर उसे विश्वमंच पर स्थापित किया। यही वजह रही कि भारत सरकार ने उन्हें पद्मविभूषण जैसे सम्मान से नवाजा। राजेश्वर आचार्य ने कहा कि इन सब से अलग इतनी ख्याति प्राप्त करने के बाद भी वो बेहद संजीदा, मिलनसार और व्यवहार कुशल रहे।
Published on:
10 May 2022 03:43 pm
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