डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी
वाराणसी. शहर की सीवर समस्या का हल फिलहाल नहीं मिलने वाला। इसके लिए नगरवासियों को अभी मार्च तक इंतजार करना होगा। दरअसल सीवर समस्या के निदान के लिए जल निगम शाही नाले की सफाई, मरम्मत और उस नाले की गोलाई के बराबर ही उसमें नई पाइप लाइन डाली जा रही है। लेकिन यह काम अभी आधा ही हो पाया है। ऐसा जल निगम के महाप्रबंधक का कहना है। बता दे कि जल निगम ने पिछले साल यह दावा किया था कि शाही नाले की सफाई और मरम्मत का काम दिसंबर 2017 तक पूरा हो जाएगा। उसके बाद अगले 50 साल तक बनारस को सीवर समस्या से निजात मिल जाएगी। लेकिन यह मियाद पूरी हो गई। लेकिन अभी तक यह काम चल ही रहा है। ऐसे में महाप्रबंधक एसके राय ने बताया कि उन्हें मार्च तक की मोहलत मिल गई है। इस तीन महीने में काम पूरा हो जाएगा।

बता दें कि कहा जाता है कि बनारस के शाही नाले का निर्माण 1822 में हुआ था। इसकी गोलाई चार से आठ फीट तक की है। आदम आराम से इसमें आ जा सकता है। यह शाही नाला ही शहर का मुख्य ड्रेनेज सिस्टम था। अस्सी से राजघाट तक फैले इस शाही नाले की सफाई, मरम्मत और नई पाइप लाइन बिछाने का काम फरवरी 216 में शुरू हुआ। इसके लिए संपर्क नालों को ब्लॉक कर दिया गया। इसके चलते शहर की सीवर व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई। जगह-जगह सीवर ओवर फ्लो की शिकायत आने लगी। पिछले वर्ष नगर निगम सदन की बैठक में यह मसला उठा था। तब जलकल के इंजीनियरों ने यह जानकारी दी थी कि जल निगम द्वारा मेन ट्रंक लाइन बंद कर देने के चलते सीवर ओवर फ्लो की दिक्कत आ रही है। इसी बीच कमिश्नर नितन रमेश गोकर्ण की बैठक में जल निगम ने बताया था कि शाही नाले की मरम्मत, सफाई और निर्माण का काम दिसंबर तक 2017 तक पूरा हो जाएगा, फिर आगामी 50 सालों तक सीवर की समस्या समाप्त हो जाएगी।

जल निगम ने इस काम के लिए गिरिजाघर चौराहे से लहुराबीर तक सड़क के ऊपर मोटी पाइप लाइन बिछा रखी है। इससे इलाके में जाम भी लगता है। खास तौर पर बेनिया-नई सड़क इलाके में। इसे लेकर पिछले दिनों क्षेत्रीय लोगों ने कई दिनों तक धरना प्रदर्शन भी किया था। लेकिन कोई हल नहीं निकला। कारण साफ है जब तक पूरी तरह से शाही नाला साफ नहीं हो जाएगा इसे हटाया नहीं जा सका है।
लेकिन काम पूर्व निर्धारित समय में पूरा नहीं हो पाया। नतीजा बिन बारिश सीवर लाइन चोक हो रही है। लोगों को सीवर के पानी से हो कर गुजरना पड़ रहा है वह भी जनवरी के महीने में। अभी मंगलवार को ही मैदागिन इलाके में सीवर का पानी सड़क पर बहने लगा। हंगामा मचा तो फराटी लगा कर नगर निगम और जलकल के लोगों ने साफ कर दिया। लेकिन यह समस्या का समिचित समाधान नहीं। इस मुद्दे पर पत्रिका ने बुधवार को जल निगम के महाप्रबंधक एसके राय से बातचीत की तो राय ने बताया कि कुल 7.1 किलोमीटर लंबे नाले की सफाई, मरम्मत और उसकी गोलाई के बराबर नई पाइप लाइन डाली जा रही है। अब तक 3.68 किलोमीटर ही काम हो पाया है। यह काम देश की सबसे प्रतिष्ठित फर्म श्रीराम ईपीसी से कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नाले में फ्लो ज्यादा होने के कारण काम में थोड़ी दिक्कत आ रही थी खास तौर पर दशाश्वमेध से बेनिया तक। लेकिन अब कार्य में तेजी लाई जा रही है। फर्म ने आश्वस्त किया है कि मार्च 2018 तक काम पूरा हो जाएगा। जीएम जल निगम राय ने बताया कि मरम्मत, सफाई और नई पाइप लाइन डालने के बाद आगामी 50 साल तक शहर की सीवर समस्या से निजात मिल जाएगा। इस नई पाइप लाइन से जहां जो ब्रांच लाइन जुड़ी है उसके अतिरिक्त जल निगम कोई नई ब्रांच लाइन नहीं डाल रहा है। लेकिन यह काम अत्याधुनिक तरीके से किया जा रहा है। इससे काफी राहत होगी।

इन क्षेत्रों से गुजरता है यह शाही नाला
शाही नाले की दीवार लखौरी ईट से बनाई गई है। ईट की जोड़ाई सूर्खी, चूना व गुड़ से की गई है। वक्त के साथ ये कमजोर होने के साथ जगह- जगह से क्षतिग्रस्त हो रही थी। शाही नाला अस्सी से भेलूपुरा थाना, रेवड़ी तालाब, गिरजाघर, नई सड़क, बेनियाबाग पार्क, नगर निगम के दशाश्वमेध जोन कार्यालय, पियरी चौकी, कबीरचौरा स्थित जिला महिला अस्पताल व मंडलीय अस्पताल, लोहटिया, मैदागिन चौराहा, कोतवाली, विशेश्वरगंज, मछोदरी, तेलियानाला, कमलगढ़हा, जीटी रोड, पलंग शहीद से खिड़किया घाट के पास जाकर गंगा में मिलता है। जल कल द्वारा बेनियाबाग में बनाए गए भूमिगत वाटर टैंक अंडर ग्राउंड शाही नाले के ऊपर से बनाया गया है जहां से शाही नाले को खोद कर तिरछा करके मिलाया गया है। शाही नाले में सात फाटक लगे हैं। जरूरत पड़ने पर शाही नाले के फाटक को बंद करके पीछे से आ रहे पानी को रोक कर नाले की सफाई कराई जा रही है। शाही नाले की गहराई अस्सी घाट पर चार फीट और डाउन स्ट्रीम में आठ फीट है।
