
Govinda
वाराणसी. दुनिया कई तरह के लोग हैं जो किसी को आगे बढ़ते देखना पसंद नहीं करते। बहुत लोग हैं जो गरीबों के सपनों का मजाक बनाते हैं। लेकिन ये भूल जाते हैं कि वे आज जिनका मजाक बना रहे हैं वे कभी उनसे आगे जा सकते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ वाराणसी के एक रिक्शा चालक के बेटे के साथ जिसने बड़े ही संघर्ष के साथ एक नई मिसाल कायम की । काशी में रिक्शा चलाने वाले नारायण जायसवाल ने लंबे संघर्ष के बाद अपने बेटे को आईएएस बनाया था। आज उनके बेटे गोविंदा की शादी एक आईपीएस अफसर से हुई है। दोनों पति-पत्नी गोवा में पोस्टेड हैं।
गोविंदा तीन बेटियां और एक भाई है। वह अलईपुरा में किराए के मकान में रहते थे। गोविंदा के पिता नारायण के पास 35 रिक्शे थे, जिन्हें वह किराए पर चलवाते थे। लेकिन पत्नी इंदु को ब्रेन हैमरेज होने के बाद उसके इलाज के लिए 20 से ज्यादा रिक्शे बेचने पड़े। कुछ दिन बाद उन्की पत्नी की मौत हो गई। तब उनका बेटा गोविंद सातवीं में था। गरीबी का आलम ऐसा था कि उनके परिवार को दो वक्त की रोटी खाना भी मुश्किल से मिलता था। उन दिनों नारायण खुद गोविंद को रिक्शे पर बैठाकर स्कूल छोडऩे जाते थे। उस समय गोविंदा को रिक्शे पर देखकर स्कूल के बच्चे ताने मारते थे कि रिक्शा वाले का बेटा आ गया। जब नारायण उस समय ये बोलते थे कि अपने बेटे को आइएएस बनाऊंगा तो सब गरीब पिता का मजाक बनाते थे। नारायण बताते है कि बेटियों की शादी में बाकी रिक्शे भी बिक गए। बाद में उनके पास सिर्फ एक रिक्शा बचा था, जिससे चलाकर वह अपना घर चलाता था। पैसे की तंगी के कारण गोविंद सेकंड हैंड बुक्स से पढ़ता था।
Updated on:
17 Nov 2018 02:23 pm
Published on:
17 Nov 2018 01:38 pm
बड़ी खबरें
View Allवाराणसी
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
