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कौशल विकास से जुड़े संस्कृत, पाठ्यक्रम में बदलाव की आवश्यकता:-प्रो.अर्कनाथ
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कौशल विकास से जुड़े संस्कृत, पाठ्यक्रम में बदलाव की आवश्यकता:-प्रो.अर्कनाथ

सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 35 वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने छात्रों को दिये सफलता के टिप्स, जानिए क्या है कहानी
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वाराणसी

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Devesh Singh

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Updated: 24 Dec 2017, 6:20 PM IST

वाराणसी. संस्कृत देववाणी है और संस्कृत में अधिक रोजगार सृजन करने के लिए इसे कौशल विकास से जोडऩा चाहिए। समय- समय पर संस्कृत के पाठ्यक्रमों में बदलाव करने की भी आवश्यकता है। यह बात सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, गुजरात के वीसी प्रो.अर्कनाथ चौधरी ने रविवार को सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 35 वें दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि कही।
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उन्होंने कहा कि संस्कृत के प्रति लोगों का रूझान बढ़ाना बहुत जरूरी है। संस्कृत व संस्कृति से भारत की प्रतिष्ठा जुड़ रहती है। भगवान शिव के त्रिशूल पर वास करने वाली काशी नगरी संस्कृत भाषा की राजनधानी भी है। काम , मोक्ष, धर्म व अर्थ के जरिए समस्त इच्छित वस्तू की प्राप्ती होती है इसके बाद लोग मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। हमे ऐसी विद्या का अध्ययन करना चाहिए, जिससे मुक्ति मिल सके। संस्कृत ऐसी भाषा है जिसके अध्ययन से हमें धर्म की प्राप्ती होती है और अंत में मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि दुनिया की सबसे पहली भाषा संस्कृत है और देववाणी ऐसी वैज्ञानिक भाषा है, जिससे अन्य भाषा का जन्म हुआ है। राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि काशी के तीन विभूतियों को कोई भूल नहीं सकता है मालवीय जी, राष्ट्ररत्न शिवप्रसाद गुप्त व डा.सम्पूर्णानंद ने एक-एक विश्वविद्यालय की सौगात दी है, जहां पर शिक्षा की अलख जल रही है। उन्होंने कहा कि संस्कृत व योग के रिश्ते को सारी दुनिया जानती है। पीएम नरेन्द्र मोदी ने विश्व को योग के महत्व की जानकारी दी है, जिससे बाद से विश्व योग दिवस मनाया जाता है। राज्यपाल ने मुख्य अतिथि के भाषण की तारीफ करते हुए कहा कि भविष्य में छात्रों को डिग्री के साथ ऐसे भाषण की प्रति भी उपलब्ध करानी चाहिए, जिससे उन्हें अच्छी शिक्षा मिलती रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो.रामकिशोर त्रिपाठी, पौराणिक मंगलाचरण सुनील कुमार चौधरी, स्वागत भाषण वीसी प्रो.यदुनाथ प्रसाद दुबे व धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी ने किया। दीक्षांत समारोह आरंभ होने से पहले शिष्ट यात्रा यात्रा निकाली गयी। समारोह में ही 37 छात्रों को 57 मेडल दिया गया।
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