
संजय, मेगुमी और ऋषि
वाराणसी. जब भारत कुमार (मनोज कुमार) ने फिल्म पूरब पश्चिम में गाया कि, ... ''प्यार में कोई शर्त होती नहीं, पर प्यार ? शर्तों पे तुमने किया..'' उस फिल्म में भी भारत की माटी से जुड़ाव का सवाल था, जब प्यार में डूबी नायिका इंग्लैंड छोड़ भारत आने को तैयार न थी। लेकिन वह भारत भी आई और यहीं की हो कर रह भी गई। कुछ उसी तरह की मिलती-जुलती कहानी बनारसी छोरे संजय और जापानी मेगुमी की। बस फर्क है तो फिल्म पूरब पश्चिम में भारत कुमार इंग्लैड में थे और वह भारत लौटना चाहते थे और मेगुनी काशी में थी और जापान लौटना चाहती थी। लेकिन दिलचस्प यह है कि दोनों के प्यार के बीच की सरहद की दीवार आखिर टूटी। मेगुनी को मनाने में संजय कामयाब हो गया और दोनों की भारतीय रीति-नीति से शादी हुई। अब तो संजय और मेगुमी की हर सुबह एक नई सुहानी सुबह होती है। दिन बीतते देर नहीं लगे और धीरे-धीरे 14 साल बीत गए पर प्यार अब भी वैसे ही जवान है। उनके प्यार की निशानी भी है। सभी खुशी खुशी बनारसी अंदाज में अपने प्यार को परवान चढ़ा रहे हैं।
बात 2003 की है एक जापानी छात्रा मेगुमी हिसादा संगीत सीखने के लिए काशी आई। आम तौर पर विदेशों से आने वाले सैलानी और विद्यार्थी बंगाली टोला, हनुमान फाटक, हरिश्चंद्र घाट के आस-पास ही रहते हैं। मेगुनी भी वहीं पहुंच गई जहां उसकी मुलाकात हुई कैसेट की दुकान चलाने वाले संजय कुमार देववंशी से। शास्त्रीय संगीत की शौकीन मेगुमी को संजय नित नए ऐसे कैसेट दिया करता था कि वह शास्त्रीय संगीत के सुरीले सुरों के साथ-साथ संजय की भी दीवानी होती गई। दोनों के बीच कब ये प्यार परवान चढा दोनों को नहीं मालूम। पर एक दिन वह भी आया जब मेगुमी ने मन ही मन सीधे, सरल और मृदुभाषी संजय के साथ जिंदगी बसर करना तय कर लिया।
एक दिन मेगुमी ने थोड़ा सकुचाते हुए अपने दिल की बात संजय से कही तो कुछ क्षणों के लिए तो वह अवाक रह गया। उसे मेगुमी की बातों पर सहज विश्वास ही नहीं हो रहा था। लेकिन अगले ही पल उसकी तंद्रा टूटी तो मेगुमी ने एक शर्त रख दी। एक और झटका, शर्त थी कि पहले कम से कम छह महीने के लिए जापान चलो। वहां रहो। फिर आगे की बात फाइनल होगी। लेकिन इस बार संजय पूरी तरह से चैतन्य रहा। उसने जवाब दिया, वो भी जवाब कम शर्त ही थी, शादी भले जापान में हो जाए पर उसके बाद वह बनारस लौटेगा और यहीं रहेगा और उसे भी यहीं रहना होगा। संजय के प्यार में डूबी मेगुमी ने स्वीकार कर लिया और 1 फरवरी 2004 को हिंदू रीति रिवाज से दोनों ने शादी कर ली।
अब शादी के 14 साल बीत गए। कैसेट की दुकान अब रेस्टोरेंट में तब्दील हो गई है। दोनों एक साथ खुशी-खुशी बनारस में एक जापानी रेस्टोरेंट चला रहे हैं। इस बारे में मेगुमी का कहना है कि, ''प्यार इंसान से नहीं उसकी आदतों और व्यवहार से होता है बस मुझे संजय की यही चीजें बहुत अच्छी लगी और उनकी सादगी की वजह से मैंने उन्हें अपना जीवन साथी बना लिया।'' इन दोनों का एक लाडला 5 साल का बेटा है जिसका नाम ऋषि हिसादा है। एलकेजी में पढ़ने वाले ऋषि को जापानी भी आती है और इंग्लिश व हिंदी भी। वह बखूबी बनारसी भी बोल लेता है। संजय बताते हैं कि उनकी शादी की बात जब हुई थी उस वक्त घरवाले कुछ कनफ्यूज थे क्योंकि बहू विदेशी थी लेकिन अब जब शादी को इतने साल हो चुके हैं तो घर वाले भी खुश हैं। वजह मेगुमी ने जापानी संस्कृति से होते हुए भी पूरी तरह से भारतीय संस्कृति को अपना लिया है और घर से लेकर रेस्टोरेंट तक वह पूरी तरह से इंडियन कल्चर का पालन करती है।
Published on:
09 Feb 2018 06:52 pm
