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काशी विश्वनाथ मंदिर से मिलने वाले वजीफे के वितरण को संस्कृत विवि ने बनाई ये रणनीति

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से संपूर्णानंद संस्कृति विश्वविद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति लिए अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा पास करनी होगी। उसके बाद साक्षात्कार होगा। फिर मिलेगी छात्रवृत्ति। ये व्यवस्था विश्वविद्यालय ने काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के फैसले के बाद किया है।

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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय (फाइल फोटो)

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय (फाइल फोटो)

वाराणसी. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने के फैसले के बाद विश्वविद्यालय ने एक व्यवस्था बनाई है। इसके तहत विश्वविद्यालय के सभी 22 विभागों के मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के लिए लिखित परीक्षा देनी होगी। परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का साक्षात्कार होगा। उसके बाद ही छात्रवृत्ति मिलेगी।

गरीब छात्रों को दी जाएगी छात्रवृत्ति

कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की बैठक में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 22 विभागों/रेयर विषयों के दो-दो मेधावी विद्यार्थियों को 2000-2000 (दो-दो हजार) रुपये प्रतिमाह 10 माह तक छात्रवृत्ति के रूप देने निर्णय लिया है। यह छात्रवृत्ति देने का आधार आर्थिक रूप से विपन्न छात्र होंगे। इसके लिए अलग से परीक्षा और साक्षात्कार लेकर मेरिट के आधार पर चयनित प्रत्येक परंपरागत विभागो/विषयों के छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाएगी। इस संबंध में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष प्रो नागेंद्र पांडेय ने कहा है कि संस्कृत के विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अध्ययन करने मे समर्थ नही हो पाते इसलिये उन्हे छात्रवृत्ति देने की अतिआवश्यकता को देखते हुए सभी न्यास के सदस्यों ने अपनी सहमति देकर स्वीकार किया।

ये भी पढें- श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिद का फैसलाः संस्कृत के मेधावी छात्रों को दिया जाएगा वजीफा

छात्रवृत्ति वितरण में होगा सालाना 8,80,000 रुपये व्यय

छात्रवृत्ति के रूप में हर छात्र को (2000 रुपये) दो-दो हजार रुपये प्रतिमाह वर्ष में 10 माह तक दिए जाने हैं। इस तरह 20 हजार परंपरागत विभाग में देय होगा। इस तरह 10 माह के लिए दो-दो छात्रों को रुपये 40 हजार प्राप्त होंगे। ऐसे में 22 विभागों में कुल 8,80,000 रुपये प्रतिवर्ष (10 माह तक) व्यय होने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री, कुलाधिपति एवं मुख्यमंत्री का संस्कृत के प्रति सद्भाव

कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित कुलाधिपति भी संस्कृत के विद्यार्थियों को हर संभव आवश्यकता को पूर्ण करने पर तत्पर हैं। उन्हे अध्ययन मे किसी भी तरह का व्यवधान उत्पन्न नहीं होगा। उसी परिप्रेक्ष्य में विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद ने छात्रवृत्ति के रूप में देकर एक बड़ा ऐतिहासिक पहल की है। इससे संस्कृत के विद्यार्थियों का संस्कृत पढने के प्रति रुचि भी बढेगी।

विश्वविद्यालय परिवार ने न्यास के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित किया
इसके लिये विश्वविद्यालय के सभी लोगों ने हर्षित भाव से न्यास के अध्यक्ष, कार्यकारी अध्यक्ष व सभी सदस्यों का हृदय से आभार/कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सदैव सहयोग की अपेक्षा की।