
काशी की विरासत मां गंगा और गंगा घाट
वाराणसी. शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की चीन के शंघाई में हुई बैठक में काशी को सितंबर 2022 से सितंबर 2023 के लिए सांस्कृतिक व पर्यटन की राजधानी घोषित किए जाने की सूचना ने काशीवासियों को गदगद कर दिया है। अब ये उम्मीद जगी है कि काशी के पर्यटन उद्योग को नई उचाइंयां मिलेंगी। एससीओ के सदस्य राष्ट्रों के सैलानी भी काशी आएंगे। इस तरह से काशी में विदेशी सैलानियों के आगमन की रफ्तार में तेजी आएगी। साथ ही इस घोषणा के बाद से उम्मीद जगी है कि यहां के लोगों के लिए रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे।
फरवरी में भेजा गया था यूपी सरकार को बनारस का डोजियर
इस संबंध में बनारस मंडल के कमिश्नर दीपक अग्रवाल का कहना है कि काशी को सांस्कृतिक व पर्यटन राजधानी घोषित कराने के लिए फरवरी में ही तकरीबन सौ पेज का डोजियर यूपी सरकार और संस्कृति मंत्रालय को भेजा गया था। उस डोजियर में काशी की महत्ता, प्राचीनता, गंगा घाट, मंदिर, सांस्कृतिक विरासत, साहित्य, कला व कलाकार, पौराणिक व आधुनिक शिक्षा से संबंधित पूरी जानकारी दी गई थी। इसके अलावा यहां के व्यंजन, वर्ष पर्यंत चलने वाले सांस्कृतिक आयोजनों का भी डिटेल था। उन्होंने बताया कि काशी के सांस्ककृतिक व पर्यटन की राजधानी बनने से रोजगार के मौकों में भी वृद्धि होगी।
काशी को अब पूरे विश्व में मिलेगी अलग पहचान
वाराणसी की देव दीपावली, श्री काशी विश्वनाथ धाम, संकटमोचन संगीत समारोह और सारनाथ काफी प्रसिद्ध है। इसके अलावा रामनगर की रामलीला भी काफी फेमस है। अब इन सभी को पूरे विश्व में पहचान मिलेगी।
क्या है एससीओ
दरअसल एससीओ यानी शंघाई सहयोग संगठन राजनैतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन है। इसमें भारत के अलावा चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, तजाकिस्तान सहित कुल आठ देश शामिल हैं। इस संगठन से जुड़े देश आतंकवाद के खिलाफ आपसी सहयोग को बढ़ावा देने तथा क्षेत्रीय शांति के लिए साथ मिल कर काम करते हैं। आबादी के लिहाज से ये दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन व उपभोक्ता बाजार है।
Published on:
16 Jul 2022 10:20 am
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