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औरत को निहत्थी करती है यौन हिंसा- प्रो चंद्रकला

हिंदी विभाग, महिला महाविद्यालय ,काशी हिंदू विश्वविद्यालय और प्रगतिशील लेखक संघ का संवाद-परिसंवाद कार्यक्रम, गरिमा श्रीवास्तव की पुस्तक 'देह ही देश' का लोकार्पण।

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संवाद-परिसंवाद कार्यक्रम

संवाद-परिसंवाद कार्यक्रम

वाराणसी. यौन हिंसा जब किसी स्त्री पर होती है तो वह उसको और निहत्थी करती है। यह कहना है महिला महाविद्यालय बीएचयू की प्राचार्य, प्रो.चंद्रकला त्रिपाठी का। वह हिंदी विभाग, महिला महाविद्यालय ,काशी हिंदू विश्वविद्यालय और प्रगतिशील लेखक संघ का संवाद-परिसंवाद को संबोधित कर रही थीं। इस मौके पर गरिमा श्रीवास्तव की पुस्तक 'देह ही देश' का विमोचन भी हुआ। इस पुस्तक के चर्चा करते हुए प्रो त्रिपाठी ने कहा कि समाज को नई दृष्टि से देखने की किताब है 'देह ही देश'। यह रचना मनुष्यता के बेदखली का इतिहास है।

'देह ही देश' की लेखक प्रो. गरिमा श्रीवास्तव ने पुस्तक लेखन प्रक्रिया बताते हुए अपने क्रोएशिया प्रवास की चर्चा की। क्रोएशिया में 400 से अधिक बलात्कार राहत कैम्प की चर्चा करते हुए वहां की स्त्रियों की वर्तमान स्थिति की चर्चा की। छात्राओं से मुखातिब श्रीवास्तव ने बताया कि इसके प्रकाशन की कोई योजना नहीं थी लेकिन मन में एक उद्देश्य समाज को वहां की स्थितियों से अवगत कराना था। लिखने बैठी और पुस्तक तैयार हो गई।

डॉ.वंदना चौबे ने गरिमा श्रीवास्तव के रचना कर्म की चर्चा करते हुए 'देह ही देश' के भाव को भारतीय संदर्भ में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सांगठनिक बलात्कार वर्चस्व, भसांगठनिक बलात्कार वर्चस्व, भय और शक्ति प्रदर्शन का एक रूप है। हिंदी विभाग, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो.आशीष त्रिपाठी ने कहा की 'देह ही देश' की रचना प्रक्रिया कथेतर साहित्य के नवीन विधा का सृजन करती है। देह ही देश' साहित्य के अनेक विधाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली एक महत्वपूर्ण रचना है। झूठा- सच का संदर्भ लेते हुए ही 'देह ही देश' की रचना प्रक्रिया को रूपायित किया। प्रो.अवधेश प्रधान ने कहा कि गरिमा श्रीवास्तव की पुस्तक केवल स्त्री तक सीमित न होकर व्यापक स्तर पर मानवीय संवेदनाओं को उद्घाटित करती है।

संवाद - परिसंवाद के इस कार्यक्रम में डॉ गोरखनाथ, डॉ मोहम्मद आरिफ़, कामता प्रसाद और नगर के अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। छात्र- छात्राओं के साथ अनेक प्रोफेसर और शहर के अनेक गणमान्य उपस्थिति भी महत्वपूर्ण रही। शोधार्थी निवेदिता एवं ज्योति तिवारी ने भी विचार रखे। संचालन हिंदी के आचार्य डॉ. नीरज खरे ने किया जबकि महिला महाविद्यालय की आचार्य प्रो.सुमन जैन ने आभार जताया। अतिथियों के स्वागत संग विषय प्रस्तावना डॉ. प्रभाकर सिंह ने रखा।