
बताया जा रहा है कि, उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी, जिसके बाद उन्हें चेन्नई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

निधन की खबर मिलने के बाद हनुमान घाट स्थित उनके आश्रम में सभी शोक में डूब गए।

शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के अनुयायी व समत समाज के लोग आश्रम पहुंचकर शंकराचार्य के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावांजली अर्पित की।

बता दें कि, शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती कांची कामकोटी के 69वें मठप्रमुख थे। वहीं पद पर आसीन होने से पहले इनका नाम सुब्रमण्यम था।19 साल की उम्र में चंद्रशेखेंद्ररा सरस्वती स्वामीगल ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जन्म 18 जुलाई 1935 में तमिलनाडु में हुआ था।