12 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पीएम मोदी के खिलाफ विपक्ष ने तलाश लिया साझा उम्मीदवार, बस अंतिम मुहर का इंतजार

भाजपा के सबसे कद्धावर नेता को हराना चाह रहा गठबंधन, कभी माधव राव सिंधिया से भी हार गए थे अटल बिहारी वाजपेयी।

3 min read
Google source verification
पीएम मोदी, राहुल, अखिलेश, केजरीवाल, शत्रुघन सिन्हा

पीएम मोदी, राहुल, अखिलेश, केजरीवाल, शत्रुघन सिन्हा

वाराणसी. आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को हराने के लिए गठबंधन ने पूरी ताकत लगा दी है। सारी रणनीति उसी के इर्द-गिर्द बुनी जा रही है। खास तौर पर साझा विपक्ष की चाहत है कि बीजेपी के दिग्गजों को उनके घरों में ही शिकस्त दी जाए। इसके लिए बीजेपी की रणनीति को भी अख्तियार करने से कोई गुरेज नहीं। मसलन बीजेपी के कद्धावर नेताओं को हराने के लिए उन्हीं की पार्टी को तोड़ कर ऐसे लोगों को लाया जाए जो कहीं न कहीं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ लगातार विषवमन कर रहे हैं। इसी सोच के साथ पीएम मोदी अगर वाराणसी से दोबारा चुनाव लड़ते हैं तो उनके विरुद्ध भी एक शक्तिशाली नेता का चयन लगभग पूरा हो गया है, बस चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार है। ऐसा इसलिए कि अंतिम वक्त में पत्ता खोलने की सूरत में बीजेपी के पास कोई विकल्प भी नहीं बचेगा।

बता दें कि आगामी चुनाव में बीजेपी के खिलाफ साझा गठबंधन का मैदान में उतरना तय है। कौन कहां से और किसके खिलाफ लड़ेगा यह रणनीति तैयार करने का काम अंतिम दौर में है। खास तौर पर बीजेपी के बड़े नेताओं के खिलाफ ऐसे लोगों को उतारने की नीति पर काम चल रहा है जो आमजन के बीच लोकप्रिय हो। बीजेपी और खास तौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुखालफत कायद से कर सकता हो या कर रहा हो। इस योजना के तहत बीजेपी को तोड़ने में भी पार्टी को कोई गुरेज नहीं। ऐसे लोगों की शिनाख्त कर ली गई है।

यहां यह भी बता दें कि महागठबंधन में यूपी में सपा, बसपा, कांग्रेस, रालोद के साथ आम आदमी पार्टी भी आ सकती है। इसके संकेत पिछले दिनों आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता, राज्यसभा सांसद संजय सिंह वाराणसी में ही मीडिया से बातचीत में दे चुके हैं। संजय सिंह ने फूलपुर और गोरखपुर संसदीय उपचुनाव का हवाला देते हुए कहा था कि वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी अगर साझा उम्मीदवार दमदार कैंडिडेट उतार दे तो इस सीट पर जीत हासिल की जा सकती है।

संजय सिंह के उस बयान के बाद जब आम आदमी पार्टी ने वाराणसी में जनाधिकार रैली निकाली तो उस मौके पर पार्टी ने बीजेपी के दिग्गज नेता, 'गन शॉट' शत्रुघ्न सिन्हा भी बनारस आए। बेनिया स्थित राजनारायण पार्क में हुई सभा को संबोधित करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने पीएम का नाम लिए बगैर जबरदस्त हमला बोला था। सवा चार साल की सरकार के एक-एक बिंदु पर सरकार की जमकर खिंचाई की थी। पीएम मोदी के साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भी निशाने पर लिया था। खास तौर पर नोटबंदी, जीएसटी, रोजगार, किसान हर मुद्दे पर उन्होंने अपने खास अंदाज में पीएम को आड़े हाथ लिया था।

वैसे भी शत्रुघ्न सिन्हा लगातार पीएम मोदी और अमित शाह पर हमलावर हैं। पार्टी में रह कर इस तरह से अन्य कोई ऐसा नहीं जो इन दोनों दिग्गजों पर लगातार हमला कर रहा हो। यही नहीं वह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ताऱीफ भी करने से नहीं चुकते। वह लोकतंत्र की रक्षा की बात करते हैं। वह तो यह भी कहते हैं कि सच्ची बात करना अगर विद्रोह है तो मैं विद्रोही हूं।

अब तक बीजेपी की तरफ से शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ न कोई बोल रहा था, लेकिन अब जिस तरह से शत्रुघ्न सिन्हा के दिल्ली दौरे के दौरान जब वह आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया के एक कार्यक्रम में शिरकत करने गए तो बीजेपी के लोगों द्वारा जिस तरह से काला झंडा दिखाया गया वह इस बात का संकेत है कि भाजपा नेतृत्व ने भी शत्रुघ्न सिन्हा की मुखालफत करने की छूट कार्यकर्ताओं को दे दी है, या यूं कहें कि गुपचुप तरीके से निर्देश दिया गया है वो शत्रुघ्न सिन्हा का मुखर विरोध करें। माना यह भी जा रहा है कि जल्द ही पार्टी शत्रुघ्न सिन्हा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा सकती है।

अब राजनीति विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ शत्रुघ्न सिन्हा अच्छे उम्मीदवार हो सकते हैं। एक बार फिर से इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण और अटल बिहारी वाजपेी बनाम माधव राव सिंधिया का किस्सा फिर से दोहराया जा सकता है। विपक्ष भी इसी गणित में है। इसके पीछे एक सोच यह भी है कि जिस तरह से बीजेपी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी तक सीमित रखने की जुगत में लगी है तो विपक्ष नरेंद्र मोदी को वाराणसी तक सीमित रखना चाहती है। उनका कहना है कि अगर मोदी और शत्रुघ्न सिन्हा का मुकाबला होता है तो यह कांटे का मुकाबला होगा।