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काशी विश्वनाथ के जलाभिषेक की मिली अनुमति, 4 डमरूदल होंगे शामिल, दरबार में जाएंगे सिर्फ 15 लोग

काशी विश्वनाथ मंदिर में निर्जला एकादशी पर पारम्परिक जलाभिषेक की अनुमति मिल गई है। इस एकादशी पर्व पर बाबा के दरबार नें 15 लोगों को जाने की अनुमति प्रशासन ने दिया है

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काशी विश्वनाथ के जलाभिषेक की मिली अनुमति, 4 डमरूदल होंगे शामिल, दरबार में जाएंगे सिर्फ 15 लोग

काशी विश्वनाथ के जलाभिषेक की मिली अनुमति, 4 डमरूदल होंगे शामिल, दरबार में जाएंगे सिर्फ 15 लोग

वाराणसी. काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Mandir) में निर्जला एकादशी पर पारम्परिक जलाभिषेक की अनुमति मिल गई है। इस एकादशी पर्व पर बाबा के दरबार नें 15 लोगों को जाने की अनुमति प्रशासन ने दिया है। जिसमें 11 कलश धारियों नके संग चार डमरूदल के लोग शामिल होंगे। मन्दिर प्रशासन के इस फैसले के बाद लोगों में काफी खुशी है। 20 वर्षों से प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के अवसर पर वृहद रूप से काशी विश्वनाथ वार्षिक कलश यात्रा आयोजित होती आ रही है। इसमें भारी तादाद में भक्त शामिल होते हैं। लेकिन इस वर्ष कोरोना के बढ़ते संक्रमण और सरकार के निर्देश की वजह से यह परम्परा निभाना सम्भव नहीं था। ऐसे में जलाभिषेक की परंपरा निभाने की अनुमति के लिए काशी मोक्षदायिनी सेवा समिति की ओर से मंदिर प्रशासन से मांग की गई थी। जिसे पूरा करते हुए प्रशासन ने पत्र जारी कर दिया।

संस्था के महामंत्री जय कुमार जैसल ने बताया कि वार्षिक कलश यात्रा में मात्र 11 श्रद्धालु यात्रा में शामिल होंगे। यात्रा 2 जून को सुबह साढ़े सात बजे राजेन्द्र प्रसाद घाट से निकाली जाएगी। जो विभिन्न मार्गों से होते हुए मंदिर पहुंचेगी।

काशी में ऐतिहासिक है बाबा का जलाभिषेक

काशी के पुराधिपति बाबा काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक ऐतिहासिक होता रहा है। पिछले सालों की बात करें तो 11 ज्योतिर्लिगों के प्रतिनिधियों की अगुआई में निर्जला एकादशी के मौके पर काशी विश्वनाथ 1008 कलश के जल से बाबा का अभिषेक किया जाता रहा है। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु शंख ध्‍वनि और डमरुओं की थाप के बीच गंगा तट से निकली कलश यात्रा में शामिल होने की परंपरा है। राजेंद्र प्रसाद घाट पर गौरी-गणेश और गंगा पूजन के साथ इसकी शुरुआ होती थी।

गंगा-गोमती और संगम के जल से अभिषेक

बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक से पहले कलश पूज किया जाता है। कलश में गंगा, गोमती और प्रयाग के संगम का जल और दूध भरकर भक्त शिव के जयकारे और हर हर महादेव' के उद्धोष से काशी को भक्तिमय कर देते हैं। सर्व मंगल की कामना के लिये यह अभिषेक किया जाता है। कलश यात्रा दशाश्‍वमेध, गोदौलिया, बांसफाटक, ज्ञानवापी होते हुए विश्‍वनाथ मंदिर पहुंचती है। जहां बाबा का अभिषेक होता है।

गंगा दशहरा पर धारा 144

जिले में लागू धारा 144 की बंदिशें एक जून यानी सोमवार को भी लागू रहेंगी। जिलाधकारी कौशल रहज शर्मा ने कहा है कि गंगा समेत किसी भी नदी में स्नान या सार्वजनिक धार्मिक कार्य लर रोक रहेगी।

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