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काशी में मानसून जैसे हालात, 3 डिग्री गिरा पारा, 8-9 अप्रैल को भारी बारिश-आंधी का अलर्ट

मौसम विभाग की मानें तो काशी और आसपास के जिलों में 8 और 9 अप्रैल को भारी बारिश हो सकती है, इसको लेकर चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी भी चल सकती है...

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वाराणसी में अप्रैल के महीने में मानसून जैसा नजारा देखने को मिल रहा है। यहां 10 दिनों में पांचवीं बार बे मौसम बारिश हुई है। वहीं, रविवार को न्यूनतम तापमान 19.7 डिग्री सेल्सियस जबकि अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3 डिग्री कम है। रविवार की सुबह काशी में लगभग एक मिलीमीटर बारिश हुई। हालांकि, दोपहर में तेज धूप निकली थी, लेकिन शाम होते होते मौसम फिर से सुहावना हो गया।

पश्चिमी विक्षोभ का असर

मौसम विभाग की मानें तो काशी और आसपास के जिलों में 8 और 9 अप्रैल को भारी बारिश हो सकती है, इसको लेकर चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी भी चल सकती है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक वज्रपात और बारिश की चेतावनी भी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि मध्य पाकिस्तान और पंजाब के आसपास पश्चिमी विक्षोभ का असर दिख रहा है। इसी कारण उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम ने अपना रंग बदला है।

बताया जा रहा है कि 7, 8 और 9 अप्रैल को प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है, जिससे तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है। वहीं, मौसम वैज्ञानिकों ने बताया है कि 10 अप्रैल के बाद मौसम शुष्क हो जाएगा और उसके बाद पारा धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ेगा।

बढ़ी किसानों की चिंता

बे मौसम हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में हो रहे उतार चढ़ाव के कारण किसान सकते में हैं। कई किसानों की फसल भी बर्बाद हो चुकी है। वहीं खेतों से काटकर खलिहान में रखी गई फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। यही वजह है जिसको लेकर किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि भारी बरसात होगी तो उनकी फसल बर्बाद हो जाएगी।

फसल खराब होने पर मिलेगा मुआवजा

जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह मौर्य ने बताया है कि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा कर रखा है, उन किसानों की फसल खराब होने पर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने बताया की फसल के खराब होने के 72 घंटे के अंदर टोल फ्री नंबर 14447 पर इसकी सूचना देनी होगी। उन्होंने बताया कि किसान यदि चाहें तो लिखित रूप से भी अधिकारियों को इसकी सूचना दे सकते हैं।