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#SaveBenaras: परवान चढ़ने लगी धरोहर रक्षा की मुहिम, अब काशी के कण-कण को जोड़ने के लिए हस्ताक्षर अभियान

पहले तोड़ा ब्यास मंदिर अब उसका नक्शा बनवाने की कवायद।

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विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र

विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र

वाराणसी. प्राचीन नगरी काशी के वजूद को मिटन से बचाने की मुहिम, बचा रहे बनारस- बना रहे बनारस अब परवान चढ़ने लगी है। काशी का कण-कण ( तकरीबन हर नागरिक) इस मुहिम से जुड़ने लगा है, जो अब तक नहीं जुड़ पाए हैं उन्हें भी साथ करने के लिए सामाजिक संस्था साझा संस्कृति मंच ने सोमवार से हस्ताक्षर अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। संस्था के प्रणेता बल्लभाचार्य पांडेय ने पत्रिका को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि काशी का हर नागरिक अपनी धरोहर के संरक्षण के लिए उतावला है। उन्होंने कहा कि जो इससे पूरी तरह से भिज्ञ नहीं हैं उन्हें उनके पुरखों की थाती के बारे में बताने और उसे बचाने के लिए ही यह हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जा रहा है। अभियान का आगाज सोमवार को अस्सी घाट पर शाम चार से 5.30 बजे तक चलेगा। फिर इस आगे भी बढाया जाएगा। वैसे बचा रहे बनारस, बना रहे बनारस और #SaveBenaras के स्लोगन के साथ धरोहर की रक्षा का अभियान तेजी से सोशल मीडिया पर भी वायरल होने लगा है। फेसबुक पर इसके पक्ष और विपक्ष में तमाम तर्क-वितर्क किए जा रहे हैं।

फेसबुक पर चल रही चर्चाओं में से एक उद्धरण सुरेश प्रताप जी की वॉल का है जिसमें वह लिखते हैं, # पक्कामहाल : विश्वनाथ मंदिर के पास जिस भवन व मंदिर को जमींदोज किया गया है, उसका मलवा तस्वीर में देखा जा सकता है। गणेशजी का मंदिर भी तोड़ा गया. और जिस समय यह कार्रवाई हुई, तब शहर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजद थे, जिस भारत माता मंदिर को ध्वस्त किया गया, वह अब खुले आसमान में हैं. उसे तस्वीर में लाल घेरे के अंदर देखा जा सकता है। इस खबर को पक्कामहाल की गलियों से बाहर निकलने में समय लग गया। मकान व मंदिर को तोड़ने के विरोध में क्षेत्रीय नागरिकों ने संघर्ष समिति गठित की है।

आगे वह लिखते हैं कि आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा व राजनाथ तिवारी ने बताया कि अब यह आन्दोलन रूकने वाला नहीं है। विरोध जारी रहेगा. संघर्ष समिति के पोस्टर गलियों में दीवारों पर चिपका दिए गए हैं, जिस पर लिखा है "जिंदगी से दूर होंगे, विश्वनाथ से नहीं, जान देंगे घर नहीं"। मजे की बात यह है कि यह क्षेत्र भाजपा का गढ़ है. पद्मपति जी ने बताया कि मंडन मिश्र के घर को भी ध्वस्त कर दिया गया है। बता दें कि मंडन मिश्र ने आदि शंकराचार्य से शास्त्रार्थ किया था। साझा संस्कृति मंच भी ध्वस्तीकरण के विरोध में आन्दोलन कर रही है। मंच के डॉ. आनन्द प्रकाश तिवारी ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया बनारस के ताने-बाने को ध्वस्त कर देगी. इसका विरोध जारी रहेगा।

इतना ही नहीं इसी परिसर में उस ब्यास जी का आवास भी था जिसे रात दो बजे ध्वस्त किया गया था। वह ब्यास जी जो श्री काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद क्षेत्र के इकलौते रक्षक व वारिस भी बताए जाते हैं। औरंगजेब के आक्रमण के बाद से यह ब्यास परिवार ही इस परिक्षेत्र का रक्षक रहा है। लेकिन क्षेत्रीय नागरिकों के विरोध का नतीजा यह निकला कि अब वाराणसी विकास प्राधिकरण ने उस ध्वस्त किए गए भवन को फिर से बनाने के लिए नया नक्शा मांगा है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर महंत परिवार के सदस्य राजेंद्र तिवारी की मानें तो ब्यास परिवार को पहले समझाया गया कि वह अपना आवास दे दें, उनके इंकार करने पर रात दो बजे पुलिस व प्रशासन के लोगों ने उनका आवास गिराया था और उन्हें वृद्धाश्रम भेज दिया था।