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#SaveBenaras-काशी की धरोहर बचाने को शुरू हुआ हस्ताक्षर अभियान, पीएम को भेजा मांग पत्र

अस्सीघाट पर जुटे काशीवासी, प्रधानमंत्री को संबोधित एक मांग पत्र पर भी लोगों हस्ताक्षर किए।

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काशी की धरोहर बचाने को हस्ताक्षर अभियान

काशी की धरोहर बचाने को हस्ताक्षर अभियान

वाराणसी. काशी की धरोहर बचाने को लामबंद काशीवासियों ने सोमवार से शुरू किया हस्ताक्षर अभियान। इसके लिए काशीवासियों का अस्सीघाट पर जुटान हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री को संबोधित मांग पत्र पर भी लोगों ने हस्ताक्षर किए। यह मांग पत्र डाक द्वारा दिल्ली प्रेषित किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि वाराणसी के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत अनेक कार्य प्रस्तावित हैं, उनमे से अधिकांश पर कार्य प्रारंभ भी हो चुका है। इसी क्रम में “गंगा पाथवे” और “बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर” जैसी योजनायें भी चर्चा में हैं जिसे लेकर लोगों में भ्रम व्याप्त है। एक तरफ हृदय योजना के तहत वाराणसी के धरोहरों को संजोने का कार्य चल रहा है, वहीं दूसरी ओर घाट, प्राचीन भवन, पूजा स्थलों, गलियों आदि के स्वरूप को बदलने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं, जो काशी की प्राचीनता पर हमला है। इसे काशीवासी स्वीकार नही कर सकते क्योंकि इससे यहां की पौराणिकता, प्राचीनता, विशेषता और हेरिटेज महत्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. सरकार को इस मामले में तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

काशी के धरोहरो और यहां के हेरिटेज स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए संचालित आन्दोलन के तहत सोमवार को साझा संस्कृति मंच के तत्वावधान में अस्सी घाट पर हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। हस्ताक्षर अभियान के साथ काशी के कुछ धरोहर और मंदिर जो पाथवे योजना की जद में आ रहे हैं के चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाईं गई।

हस्ताक्षर अभियान में प्रमुखता से निम्न मांग की गईं:-
1-वाराणसी के सभी घाट, गलियों, प्राचीन पूजा स्थलों, प्राचीन भवनों और ऐतिहासिक महत्व की इमारतों के स्वरूप को किसी भी दशा में न छेड़ा जाय। सभी की सुरक्षा और संरक्षण की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। धरोहरों को हेरिटेज की श्रेणी में लाने की दिशा में प्रयास किए जाएं। प्रस्तावित बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर और गंगा पाथ वे जैसी गैरकानूनी योजनाओं का हम विरोध करते है, इन्हें तत्काल खारिज किया जाय और अनावश्यक रूप से मकानों और मंदिरों का चिन्हीकरण बंद हो। भविष्य में ऐसी योजनायें बनाते समय माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद की जनहित याचिका संख्या 31229/2005 (कौटिल्य सोसाइटी बनाम राज्य सरकार) और माननीय उच्चतम न्यायालय की रिट याचिका संख्या 611/1993 (मो. असलम उर्फ़ भूरे बनाम भारत सरकार) में पारित आदेशों और इन मुकदमो में सरकार की तरफ से दाखिल शपथपत्रों को संज्ञान में रखा जाय।

2- गंगा के 200 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का नया निर्माण प्रतिबंधित होना चाहि। नगर के विकास की कोई भी योजना बनाए जाने से पूर्व उस पर नगर निगम की बैठक में संस्तुति लिया जाना अनिवार्य होना चाहिए। सभी योजनाओं के बारे में पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे सम्बंधित पार्षदों एवं स्थानीय जनता को सभी सूचनाएं प्रामाणिक रूप में मिलती रहें तथा भय, भ्रम और दहशत की स्थिति न बने।

3-वाराणसी की परम्परा और संस्कृति से जुड़े सेवादारो जैसे तांगा वाले, रिक्शा चालक, नाविक आदि की आजीविका को दृष्टिगत रखते हुए उनका अनावश्यक विस्थापन और उत्पीडन नही होना चाहिए। वाराणसी में समुचित वेंडिंग जोन बना कर 24 हजार से अधिक ठेला पटरी दुकानदारों की सम्मानजनक आजीविका सुनिश्चित की जानी चाहिए. पौराणिक महत्व के सभी कुंडों, तालाबो, कूपों आदि को अतिक्रमण और प्रदूषण से मुक्त कर संरक्षित किया जाना चाहिए.

ये थे मौजूद

कार्यक्रम में वल्लभाचार्य पांडेय, डा आनंद प्रकाश तिवारी, डा. इन्दू पाण्डेय, ए के लारी, राजनाथ तिवारी, प्रदीप सिंह, विशाल त्रिवेदी, विनय सिंह, शालिनी, रूपेश पाण्डेय, संजीव सिंह, संजय चौबे, राजनाथ तिवारी कपीन्द्र तिवारी, हजारी शुक्ल, राकेश कुमार, दिवाकर सिंह, कुसुम वर्मा, रविशेखर, एकता रोहित यादव, प्रीती सिंह, प्रहलाद मिश्र, एजाज अहमद आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

आगे का कार्यक्रम
27 फरवरी को हस्ताक्षर अभियान पक्के महाल इलाके में और भैसासुर घाट पर चलेगा, इस दौरान पर्चा वितरण भी किया जाएगा.