
Kheer
वाराणसी. पूर्णिमा की रात सबसे प्यारी रात होती है। लेकिन बात शरद पूर्णिमा की हो तो यह रात सबसे सुंदर और अनोखी होती है। शरद पूर्णिमा आश्विन माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को कहा जाता है। इस साल यह 24 अक्टूबर को पड़ रहा है। इस रात को चंद्रमा संपूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और अपनी चांदनी में अमृत बरसाता है। इस दिन से शरद ऋतु का शुरुआत हो जाता है। शरद पूर्णिमा की रात को खुले आसमान में खीर बनाकर रखने की प्रथा सदियों से चली आ रही है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन खुले आसमान में रखी जाने वाली इस खीर को खाने से सभी रोगों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि इस दिन चांद अपनी सभी 16 कलाओं से भरा होता है, जिस वजह से चांद रात 12 बजे धरती पर अमृत बरसाता है। कहा जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। साथ ही भगवान कृष्ण ने गोपियों संग वृंदावन के निधिवन में इसी दिन रास रचाया था।
ऐसे रखें खीर- शरद पूर्णिमा के दिन खीर को आसमान के नीचे ढककर नहीं रखना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन ओस की बूंदों में अमृत बरसता है। जो खीर में पड़ता है। इस भोग को 12 बजे रात के बाद खाना शुभ माना जाता है।
शरद ऋतु के खीर खाने के फायदे
1-शरद पूर्णिमा की खीर अस्थमा रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद बताई जाती है।
2-अस्थमा मरीजों के साथ-साथ शरद पूर्णिमा की खीर को चर्म रोग से परेशान लोगों के लिए भी अच्छा बताया जाता है।
3-आंखों से जुड़ी बीमारियों से परेशान लोगों को भी ये खीर बहुत फायदा पहुंचाती है। साथ ही आंखों की कम होती रोशनी वाले लोगों को इस चांद को एकटक देखते रहना चाहिए। क्योंकि इससे आंखों की रोशनी में सुधार होता है।
4-साथ ही ये खीर दिल के मरीज़ों और फेफड़े के मरीज़ों के लिए भी काफी फायदेमंद होती है।
Updated on:
24 Oct 2018 05:49 pm
Published on:
24 Oct 2018 11:14 am
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