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वाराणसी संसदीय सीट जहां से सप-बसपा का अब तक नहीं खुला खाता, जानें क्या हैं आंकड़े…

अबकी कांग्रेस-भाजपा में रिकॉर्ड बनाने की होड़।

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Varanasi

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डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी

वाराणसी. लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। भले ही अभी सभी राजनीतिक दलों ने सभी सीटों के लिए प्रत्याशी की घोषणा न की हो। लेकिन वाराणसी की हाईप्रोफाइल संसदीय सीट सपा-बसपा गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी के खाते में आई है। यह दीगर है कि समाजवादी पार्टी भी अभी तक तय नहीं कर पाई है कि वह वाराणसी से किसे उम्मीदवार बनाए। अखिलेश यादव ने गेंद वाराणसी कमेटी के पाले में डाल दी है। अब बनारस सपा संगठन पशोपेश में है कि वह किसे चुने।

बनारस में अब तक नहीं खुला है सपा-बसपा का खाता

वैसे बनारस संसदीय सीट की बात करें तो यहां अब तक के रिकार्ड बताते हैं कि सपा-बसपा का खाता नहीं खुल सका है। यानी एक बार भी इस सीट से इन दोनों में से कोई नहीं जी सकता है। आंकड़ों के अनुसार शुरूआती दौर में कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा। आजादी के बाद से लगातार छह बार कांग्रेस इस सीट पर विजयी रही। फिर 2004 में डॉ राजेश मिश्र ने वाराणसी सीट कांग्रेस के झोली में डाली थी। वहीं भाजपा भी अब तक सात बार इस सीट पर विजयी हो चुकी है। इस बार कांग्रेस और भाजपा के पास है बनारस में जीत का रिकार्ड कायम करने का मौका। वहीं सपा पहली बार जीत का सेहरा बांध मिथकों को तोड़ने की पूरी कोशिश करेगी।

2014 के परिणाम
2014 में बनारस से विजयी हुए थे भाजपा के नरेंद्र मोदी जिन्हें कुल 5,81,022 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर थे आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल जिन्हें कुल 2,09,238 मत मिले थे। कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को तीसरा स्थान मिला था, उन्हें कुल 75,614 वोट मिले थे। बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी विजय प्रकाश जायसवाल चौथे स्थान पर रहे, उन्हें 60,579 मत मिले थे जबकि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी कैलाश चौरसिया 45,291 मतों के साथ पांचवें स्थान पर रहे थे।

2009 के परिणाम
2009 में बीजेपी के डॉ मुरली मनोहर जोशी चुनाव जीते, उन्हें कुल 203122 मत मिले। दूसरे स्थान पर रहे बसपा के मोख्तार अंसारी जिन्हें 185911 मिले। तीसरे स्थान पर रहे सपा से अजय राय जिन्हें 123874 मत हासिल हुए थे। कांग्रेस प्रत्याशी डॉ राजेश मिश्र को महज 66386 मतों से संतोष करना पड़ा था।

बनारस संसदीय सीट का इतिहास
बता दें कि बनारस संसदीय सीट से 1952 से 1962 तक कांग्रेस के रघुनाथ सिंह लगातार तीन बार विजयी हुए। 1967 में मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के सत्यनारायण सिंह ने यह सीट कांग्रेस से छीनी। लेकिन पांच साल बाद फिर से प्रो राजाराम शास्त्री ने यह सीटकांग्रेस की झोली में डाल दी। लेकिन इसके बाद बीएलडी के चंद्रशेखर सिंह ने यह सीट कांग्रेस से छीन ली। फिर 1980 में पंडित कमलापति त्रिपाठी ने प्रखर समाजवादी राजनारायण को हरा कर कांग्रेस के लिए यह सीट हासिल कर ली जिसे श्यामलाल यादव ने अगले चुनाव में कायम रखा। लेकिन 1991 में पहली बार बीजेपी ने इस सीट पर कब्जा जमाया, पार्टी प्रत्याशी शंकर प्रसाद जायसवाल चुनाव जीते तो अगले चार चुनावों तक वह विजयी होते रहे। उन्हें 2004 में कांग्रेस के डॉ राजेश मिश्र ने हराया। लेकिन डॉ मिश्र 2009 में अपनी सीट को कायम नहीं रख सके और भाजपा के डॉ मुरली मनोहर जोशी और कौमी एकता दल के मोख्तार अंसारी के बीच हुई कड़ी टक्कर में भाजपा के माथे जीत का सेहरा बंधा। उसके बाद नरेंद्र मोदी। यानी इस 17वें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के पास मौका है जीत का रिकार्ड बनाने का।

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक बनारस संसदीय सीट के विजेता

1-2014-नरेंद्र मोदी-बीजेपी-581022

2-2009- डॉ मुरली मनोहर जोशी-बीजेपी-203122

3-2004-डॉ राजेश मिश्रा-कांग्रेस-206904

4-1999- शंकर प्रसाद जायसवाल-बीजेपी-211955

5-1998-शंकर प्रसाद जायसवाल-बीजेपी-277232

6-1996-शंकर प्रसाद जायसवाल-बीजेपी-250991

7-1991-शंकर प्रसाद जायसवाल-बीजेपी-186333

8-1989- अनिल शास्त्री- जनता दल-268196

9-1984- श्याम लाल यादव-कांग्रेस-153076

10-1980- कमलापति त्रिपाठी-कांग्रेस-129063

11-1977- चंद्रशेखर-बीएलडी-233194

12-1971- प्रो राजाराम शास्त्री- कांग्रेस-138789

13-1967- सत्य नारायण सिंह, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)

14-1962- रघुनाथ सिंह-कांग्रेस

15-1957-रघुनाथ सिंह-कांग्रेस

16-1952-रघुनाथ सिंह-कांग्रेस