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सपा के क्षत्रिय नेताओं में घबराहट, अब राजा भैया संभाल सकते हैं मोर्चा

क्षत्रिय नेता अब इस बात का भी आंकलन करने में जुट गये हैं कि ...

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Devesh Singh

Sep 24, 2016

Raja Bhaiya

Raja Bhaiya

वाराणसी. सपा के क्षत्रिय नेताओं में बौखलाहट हो गयी है और उन्हें अब डर लगने लगा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई न हो जाये। सपा के क्षत्रिय नेता अब गोलबंदी में जुट गये हैं, ऐसे में राजा भैया भी इन नेताओं के पक्ष में मोर्चा संभाल सकते है।
सपा में अमर सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया है। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव व शिवपाल के बेहद खास अमर सिंह की पार्टी में ताकत बढ़ गयी है। मुलायम सिंह यादव ने सीएम अखिलेश व रामगोपाल यादव के विरोध के बाद भी अमर सिंह का प्रमोशन किया है उससे साफ हो जाता है कि अमर सिंह की स्थिति बहुत अच्छी हो चुकी है। अमर सिंह का पहले से सपा से नाता है लेकिन पार्टी में उनका विरोध मुलायम परिवार में नहीं था। अमर सिंह के बढ़ते कद ने सपा के अन्य क्षत्रिय नेताओं को परेशान कर दिया है।

जानिए क्यों परेशान है क्षत्रिय नेता
अमर सिंह को जब सपा से निकाला गया था तो पार्टी के अन्य क्षत्रिय नेताओं ने सपा का साथ दिया था। राजा भैया, अरविंद सिंह गोप आदि कई ऐसा नेता है जिन्होंने अमर सिंह के जाने के बाद भी क्षत्रिय समाज को सपा से जोड़ा था। इसके चलते अमर सिंह के पार्टी से चले जाने के बाद भी सपा को नुकसान नहीं हुआ था। अमर सिंह भी इस बात को जानते हैं, लेकिन उन्होंने इस प्रकरण को कभी मुद्दा नहीं बनाया था। यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले है और सपा में पहले से मौजूद क्षत्रिय नेताओं को भी चुनाव लडऩे के लिए टिकट चाहिए। ऐसे में क्षत्रिय नेताओं का लग रहा है कि अमर सिंह अपना पुराना बदला ले सकते है और उनका टिकट भी कट सकता है। ऐसे में क्षत्रिय नेताओं को अब राजा भैया पर विश्वास है जो उनकी मदद कर सकते है।


खेमेबाजी ने भी बढ़ायी चिंता
सपा की खेमेबाजी ने भी क्षत्रिय नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। एक खेमा सीएम अखिलेश के साथ खड़ा है तो दूसरा खेमा शिवपाल को अपना नेता मानता है। सपा परिवार में मची कलह फिलहाल शांत तो हो गयी है लेकिन पारिवारिक रिश्तों को टिकट बंटवारे में एक बार फिर अग्निपरीक्षा देनी होगी। सीएम अखिलेश व शिवपाल दोनों ही चाहेंगे कि अधिक से अधिक टिकट अपने खास लोगों को दिया जाये। ऐसे में विवाद होता है तो पार्टी को नुकसान भी होना तय है। क्षत्रिय नेता अब इस बात का भी आंकलन करने में जुट गये हैं कि उनका टिकट कटता है तो वह क्या कर सकते है।

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