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गांधी के अनशन के चलते अम्बेडकर ने वापस लिया था पृथक निर्वाचिका का प्रस्‍ताव

-बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस पर सपा ने दी श्रद्धांजलि- सामाजिक समानता के लिए संघर्ष के प्रतीक बने अम्बेडकर-डॉ मो आरिफ

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वाराणसी. वह बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर ही थे जिन्होंने 1932 में ब्रिटिश सरकार के समक्ष पृथक निर्वाचिका का प्रस्ताव रखा जिसे मंजूर भी कर लिया गया। लेकिन इसके विरोध में महात्‍मा गांधी ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। नतीजतन अम्बेडकर ने अपना प्रस्ताव वापस ले लिया। बदले में दलित समुदाय को सीटों में आरक्षण और मंदिरों में प्रवेश करने का अधिकार देने के साथ ही छुआ-छूत खत्‍म करने की बात मान ली गई थी। यह कहना है वरिष्ठ सपा नेता डॉ उमाशंकर यादव का। वह शुक्रवार को बाबा साहेब के परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

इस गोष्ठी के मुख्य वक्ता बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व इतिहास प्रवक्ता डॉ मोहम्मद आरिफ ने कहा कि अम्बेडकर दलित वर्ग को समानता दिलाने के लिए जीवन भर संघर्ष करते रहे। उन्होंने दलित समुदाय के लिए अलग राजनैतिक पहचान की वकालत करते रहे। उन्होंने सामाजिक छुआ-छूत और जातिवाद के खात्‍मे के लिए काफी आंदोलन किए। उन्‍होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, दलितों और समाज के पिछड़े वर्गों के उत्‍थान के लिए न्‍योछावर कर दिया। अंबेडकर ने खुद भी उस छुआछूत, भेदभाव और जातिवाद का सामना किया है, जिसने भारतीय समाज को खोखला बना दिया था।

सपा के निवर्तमान महानगर अध्यक्ष राजकुमार जयसवाल ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर बाबा साहब का जन्म महार जाति में हुआ था जिसे लोग अछूत और निचली जाति मानते थे। अपनी जाति के कारण उन्हें सामाजिक दुराव का सामना करना पड़ा। प्रतिभाशाली होने के बावजूद स्कूल में उनको अस्पृश्यता के कारण अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और जीवनपर्यंत असमानता और गैर बराबरीवाद के खिलाफ लड़ते रहें।

शालिनी यादव ने कहा कि अम्बेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में एक औपचारिक सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया। इस समारोह में उन्‍होंने श्रीलंका के महान बौद्ध भिक्षु महत्थवीर चंद्रमणी से पारंपरिक तरीके से त्रिरत्न और पंचशील को अपनाते हुए बौद्ध धर्म को अपना लिया। बाबा साहब ने कहा था कि व्यक्ति का जाति के आधार पर नहीं कर्म के आधार पर मूल्यांकन किया जाना चाहिए। संघ परिवार भारतीय संविधान को समाप्त करने की कोशिश कर रहा हैं, वहीं समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष ताकतें संविधान को बचाए रखने की लड़ाई लड़ रहे हैं। भाजपा भारत के संविधान को क्षत-विक्षत कर रही है ।

डॉ. रमेश राजभर ने कहा कि अंबेडकर दलित वर्ग को समानता दिलाने के जीवन भर संघर्ष करते रहे। उन्‍होंने दलित समुदाय के लिए एक ऐसी अलग राजनैतिक पहचान की वकालत की जिसमें कांग्रेस और ब्रिटिश दोनों का ही कोई दखल ना हो।

इस मौके पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के नवनिर्वाचित छात्रसंघ अध्यक्ष संदीप यादव एवं नवनिर्वाचित पुस्तकालय मंत्री अमित पटेल का हार्दिक अभिनंदन किया गया एवं उनके जीत की बधाई दी गई।

विचार गोष्ठी में मुख्य रूप से डॉ आनंद प्रकाश तिवारी, संजय मिश्र, लालू यादव, डॉक्टर नूर फातिमा, अभिषेक मिश्रा आर डी, संदीप यादव, प्रदेश सचिव राजू यादव, पूजा यादव, मोहम्मद असलम, पूजा सिंह, हीरू यादव, संतोष यादव बबलू, इरशाद अहमद, जिया लाल राजभर, कमलेश पटेल, विवेक यादव, विजय बहादुर यादव, दीपक यादव लालन, उमा यादव, रेखा पाल, प्रिया अग्रवाल, सुशील सोनकर, जौहर प्रिंस, शिवबली विश्वकर्मा, शिव प्रसाद गौतम, अवधेश चमार, वरुण सिंह, सत्य प्रकाश सोनू सोनू, संजय प्रियदर्शी, मनीष सिंह, दिनेश विश्वकर्मा, सुलाब राजभर, सचिन प्रजापति, दिगवंत पांडेय, स्वामीनाथ भास्कर, कमलाकांत प्रजापति, रमापति राजभर, रामकुमार यादव, मोती लाल यादव, रमेश वर्मा, राजेश पासी, सुदामा यादव, उमेश यादव आदि मौजूद रहे।

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