लोकसभा व छात्रसंघ चुनाव में कोई समानता नहीं है लेकिन राजनीतिक पार्टियों के छात्र संगठन के लिए यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। युवाओं को अपने साथ जोडऩे में लगे राजनीतिक दलों का इन चुनाव से अपने पक्ष में माहौल बनाने का मौका मिलता है। जिस पार्टी की सरकार होती है उस दल का छात्र संगठन किसी भी हाल में छात्रसंघ पर अपना कब्जा जमाना चाहता है। बीजेपी के एबीवीपी, सपा के छात्रसभा व कांग्रेस के राछास में मुख्य लड़ाई होती है। कांग्रेस की तरह राष्ट्रीय छात्र संगठन (राछास) की स्थिति कमजोर हो चुकी है इसके चलते मुख्य लड़ाई एबीवीपी व समाजवादी छात्रसभा के बीच होती है। पिछला साल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) के लिए अच्छा नहीं था। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय व हरिश्चन्द्र डिग्री कालेज में विद्यार्थी परिषद् को आशा के अनुसार सफलता नहीं मिली थी।
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