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दिवाली की रात काशी के इस घाट पर होती है तंत्र साधना, दी जाती है बलि

जलती चिताओं के बीच डमरू और घड़ियालों की तेज आवाज के साथ होती है आरती

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Tantra Sadhna

तंत्र साधना

वाराणसी. दिवाली की रात तंत्र शास्त्र की महारात्रि होती है। इस दिन सन्यासी व अघोरी अपनी नकारात्मक शक्तियों को सिद्ध करके विजय हासिल करते हैं। अमावस की काली अंधेरी रात, जब अंधेरा इतना गहरा जाता है कि हाथ को हाथ दिखाई नहीं देता। तब ऐसे में मां लक्ष्मी निकलती हैं अपना ऐश्वर्य लुटाने। मंत्र जाप और सिद्धि के लिए भी दीपावली की रात सबसे शुभ मानी गई है। ऐसा ही नजारा दीपावली की रात काशी के मणिकर्णिका घाट पर मशाननाथ मंदिर का था। जलती चिताओं के बीच डमरू और घड़ियालों की तेज आवाज के साथ होती आरती, मंदिर में गूंजते हर-हर महादेव के नारे गूंजते हैं। बताया जाता है कि साधना में ऐसी आत्माओं को शक्तियों द्वारा बुलाया जाता है, जिन्हें मुक्ति नहीं मिली हो। इन्‍हें तंत्र पूजा से मोक्ष की प्राप्ति कराई जाती है।


औघड़दानी के रूप में विराजते हैं महादेव
''काशी सिर्फ एक ऐसी नगरी है, जहां महादेव खुद औघड़ दानी के रूप में महा शमशान में विराजते हैं। तामसिक क्रिया करने के लिए नरमुंडो में खप्‍पर भरकर 40 मिनट तक आरती की जाती है। तामसिक साधना करने वालों को चमत्‍कारी सिद्धियां मिलती हैं। इस दौरान साधक अपने मंत्रों और कार्यों को सिद्ध करता है। श्मशान पर बैठकर महाकाली की उपासना और शक्ति का आह्वान किया जाता है। नारियल और नीबू की बलि दी जाती है। इस साधना को तामसी क्रिया कहा जाता है।


शुभ होता है काशी में मृत्यु
''काशी दुनिया में सिर्फ ऐसी नगरी है, जहां मानव के मृत्यु को भी मंगल माना जाता है। शव यात्रा में मंगल वाद यंत्रों को बजाया जाता है। मणिकर्णिका महाश्मशान बाबा का निवास स्थान है। इसलिए यहां श्रृष्टि के तीनों गुण सत्व, रज और तम समाहित हैं। शास्त्र के अनुसार, शव का दर्शन, बाबा विश्‍वनाथ के दर्शन के बराबर माना जाता है, क्योंकि शव ही शिव है और शिव ही सत्य है।''


दीपावली की रात होती है तंत्र साधना
ऐसी मान्‍यता है कि अनादि काल से देश में दीपावली की रात तंत्र साधना की जाती रही है। मणिकर्णिका घाट पर मशान नाथ मंदिर में भी दीपावली की रात विशेष अनुष्ठान किया जाता है। बाबा की साधना में तामसी भोग के साथ 11 खप्परों को शराब से भरा जाता है। जलती चिताओं के बीच पूजा की जाती है। बताया जाता है कि मणिकर्णिका महाश्मशान वही जगह है, जहां कई सालों की तपस्या के बाद महादेव ने भगवान विष्णु को संसार संचालन का वरदान दिया था। इसी घाट पर शिव ने मोक्ष प्रदान करने की प्रतिज्ञा की थी।