वाराणसी. प्रापर्टी के विवाद में बीते वर्ष अक्टूबर को शराब में जहर मिलाकर अधिवक्ता पुत्र नीरज मिश्र की हत्या के मामले में लोकल पुलिस की भूमिका से नाराज अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडंल गुरुवार को एसएसपी आकाश कुलहरि से मिलने पहुंचा। भेलूपुर इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बताया कि पहले तो वारदात को लेकर उन्होंने एफआईआर नहीं लिखी। एसएसपी के ही हस्तक्षेप पर मुकदमा दर्ज हुआ। पीएम रिपोर्ट में मौत की वजह स्पष्ट न होने पर उन्होंने उसे विसरा जांच के लिए नहीं भेजा। हीलाहवाली के बाद एक माह बीतने पर विसरा जांच को भेजा। रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट हो गई कि नीरज को शराब में जहर मिलाकर पिलाया गया था। नामजद एफआईआर के बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। अधिवक्ताओं का आरोप था कि इंस्पेक्टर ने घटनास्थल पर भी जाना उचित नहीं समझा, वहां मौजूद सीसी फुटेज को नहीं देखा, आरोपियों के मोबाइल की कॉल्स डिटेल को नहीं खंगाला। ऐसे में इंस्पेक्टर की नीयत पर शक है। प्रतिनिधिमंडल ने नीरज की मौत की विवेचना किसी अन्य इंस्पेक्टर से कराने की मांग की। एसएसपी ने अधिवक्ताओं को भरोसा दिलाया कि मामले की निगरानी वह स्वयं करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में विजयशंकर तिवारी, श्रीनाथ त्रिपाठी, अरुण त्रिपाठीए माइकल समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।