काशी पूरे विश्व में घाटों और तीर्थ के लिए जाना जाता है। 12 महीने चैत्र से फाल्गुन तक 15 -15 दिन का शुक्ल और कृष्ण पक्ष का होता है लेकिन आश्विन माष के कृष्ण पक्ष से शुरू होता है पितृपक्ष। जिसको कि पितरों की मुक्ति का 15 दिन माना जाता है। इन 15 दिनों के अंदर देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों पर श्राद्ध और तर्पण का कार्य होता है। काशी के अति प्राचीन पिशाच मोचन कुण्ड पर त्रिपिंडी श्राद्ध होता है जो पितरों को प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु से मरने के बाद व्याधियों से मुक्ति दिलाता है। इस श्राद्ध कार्य में इस विमल तीर्थ पर संस्कृत के श्लोकों के साथ तीन मिटटी के कलश की स्थापना की जाती है। जो काले, लाल और सफेद झंडों से प्रतिकमान होते हैं। प्रेत बाधाएं तीन तरह की मानी जाती हैं। सात्विक, राजस, और तामस। इन तीनों बाधाओं से पितरों को मुक्ति दिलाने के लिए काले, लाल और सफेद झंडे लगाये जाते हैं। जिसको कि भगवन शंकर, ब्रह्मा, और कृष्ण के प्रतीक के रूप में मानकर तर्पण और श्राद्ध का कार्य किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि पिशाच मोचन पर श्राद्ध करवाने से अकाल मृत्यु से मरने वाले पितरों को प्रेत बाधा से मुक्ति के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। पिशाच मोचन तीर्थ स्थली का वर्णन गरुण पुराण में भी वर्णित है।