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महाराजगंज के फरेंदा में बनेगा यूपी का पहला गिद्ध संरक्षण व प्रजनन केन्द्र, मिली मंज़ूरी

गोरखपुर वन प्रभाग (Gorakhpur Forest Division) में 5 हेक्टेयर में स्थापित होने वाला यह केंद्र हरियाणा (Haryana, के पिंजौर (Pinjore) में स्थापित देश के पहले जटायु संरक्षण और प्रजनन केंद्र (Vulture Conservation Breeding Centre) की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब चार से पांच करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

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गिद्ध

गोरखपुर. उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में 'जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केन्द्र' (Vulture Conservation Breeding Centre) के बनने का रास्ता साफ हो गया है। इसकी स्थापना महाराजगंज ज़िले की फरेंदा तहसील अंतर्गत भारी-बैंसी गांव में होगी। इसके लिये जहां केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गयी है तो वहीं सूबे की योगी सरकार ने 82 लाख रुपये का शुरुआती बजट भी स्वीकार किया है। 'किंग वल्चर' का यह देश का पहल संरक्षण एवम प्रजनन केन्द्र होगा। गोरखपुर वन प्रभाग (Gorakhpur Forest Division) में 5 हेक्टेयर में स्थापित होने वाला यह केंद्र हरियाणा के पिंजौर में स्थापित देश के पहले जटायु संरक्षण और प्रजनन केंद्र की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।

इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब चार से पांच करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। योगी सरकार ने इसके लिये 82 लाख रुपये का शुरुआती बजट स्वीकार करते हुए प्रभागीय वन अधिकारी गोरखपुर से 10 दिनों में डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) मांगी है। केंद्र की स्थापना वन्यजीव अनुसंधान संगठन और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) द्वारा संयुक्त रूप से की जायेगी। उत्तर प्रदेश सरकार विलुप्तप्राय गिद्धों के संरक्षण और उनकी आबादी बढ़ाने के लिए इस केंद्र की जल्द से जल्द स्थापना पर ज़ोर दे रही है।

प्रभागीय वन अधिकारी अविनाश कुमार का कहना है कि भारी बैंसी में स्थापित होने वाला 'जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केन्द्र लुप्‍तप्राय गिद्धों को बचाने के लिए काम करेगा। इसका संचालन बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के द्वारा किया जाएगा। इसके लिये सारी ज़रूरी सुविधाएं इसमें मुहैया होंगी।

बताते चलें कि गिद्ध संरक्षण पर काम कर रहे बीएनएचएस के चीफ़ साइंटिस्ट डॉ. विभु प्रकाश ने 20 सितंबर 2019 को तब के मुख्य वन संरक्षक आर हेमंत कुमार व डीएफओ अविनाश कुमार के साथ भारी बैंसी गांव के पास जंगल की ज़मीन का निरीक्षण कर शासन को भेजी रिपोर्ट में उसे केंद्र स्थापना के लिये उपयुक्त बताया था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुनील पांडेय ने कैंपा योजना के तहत धन की व्यवस्था के लिए वित्तपोषण का प्रस्ताव भेजा था।