
UP Former CM Kalyan Singh Was Foundation of Good Governance
वाराणसी. UP Former CM Kalyan Singh Was Foundation of Good Governance. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह (Kalyan Singh) ने शनिवार 21 अगस्त को अंतिम सांस ली। उनके निधन से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। एक धाकड़ नेता के रूप में जाने जाने वाले कल्याण सिंह ने अपने समय में प्रदेश के कई शातिर माफिया, डाकू, चोरों के छक्के छुड़ाए थे। ये कल्याण सिंह की सरकार की ही असर था कि अपराधियों पर इस कदर शिकंजा कसा जाता था कि वे प्रदेश छोड़ किसी अन्य जगह शरण लेने के लिए मजबूर हो गए थे। उन्होंने मुख्तार अंसारी और राजा भैया जैसे अपराधिक गतिविधियों में लिप्त माफियाओं का साम्राज्य खत्म करने की पीड़ा उठाई थी। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में नकल विहीन परीक्षा को लेकर गुड गवर्नेंस का ऐसा पाठ पढ़ाया था जो कि आज भी नजीर है।
दिवंगत कल्याण सिंह का वाराणसी जिले से पुराना रिश्ता रहा है। एक बार मलदहिया चौराहे पर हुई सभा में उन्होंने माफियाओं को ललकारा था। कल्याण सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जिला मुख्यालय पर आए थे। यहां पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह धरने पर बैठे थे। उन्होंने समझा और राजनाथ सिंह को पूरे प्रदेश का दौरा करने के लिए बस से रवाना किया था। कल्याण सिंह का बनारस आना जाना लगा रहता था। दरअसल, खोजवां निवासी पूर्व सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश सिंह से उनके पारिवारिक रिश्ते रहे हैं। वहां पारिवारिक कार्यक्रम में अक्सर आया जाया करते थे।
माफियाओं को ललकारा था
भाजपा जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा ने कल्याण सिंह को लेकर बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान अपराधियों के अंदर खौफ था। कल्याण सिंह ने माफियाओं पर शिकंजा कसा था। उनके कार्यकाल में कई एनकाउंटर हुए थे। विधायक मुख्तार अंसारी और राजा भैया जैसे बाहुबली पर शिकंजा कस गया था। भाजपा के प्रवक्ता अशोक पांडेय ने कहा कि कल्याण सिंह ने पुलिस से कहा था मानवाधिकार के सवालों से घबराने की जरूरत नहीं है। माफिया है तो उसे गोली मारो।
छात्रों को जाना पड़ा था जेल
कल्याण सिंह ने शिक्षा के छेत्र में भी कई कड़े फैसले लिए थे। जब वह मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने प्रदेश में नकल अध्यादेश लागू किया था। इसके तहत शिक्षा में नकल मारना संज्ञेय अपराध माना गया था। हालात ऐसे हुए कि जो भी छात्र इसमें लिप्त पाए गए उन्हें जेल तक जाना पड़ गया था। शिक्षा व आध्यात्म की नगरी काशी ने इस अध्यादेश का खुलकर स्वागत किया। अध्यादेश की ही असर हुआ कि जहां यूपी बोर्ड में परीक्षाओं का परिणाम 85 फीसद रहता था वह घटकर महज 25 फीसद हो गया।
Published on:
22 Aug 2021 11:01 am
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