
प्रतीकात्मक तस्वीर
वाराणसी. सूबे की राजधानी लखनऊ में मेट्रो संचालन के बाद प्रदेश सरकार अगली योजना, वाराणसी और कानपुर में मेट्रो संचालन की मंजूरी का प्रस्ताव केंद्र सरकार ने लौटा दिया है । जिसकी वजह केंद्र सरकार की नई मेट्रो नीति बतायी जा रही है। जिसके तहत शहर की आबादी 20 लाख होनी चाहिए और नई मैट्रो रेल परियोजना का निर्माण पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत किया जाएगा। जिसके बाद राज्य सरकार द्वरा कानपुर और वाराणसी के डीपीआर को केंद्र सरकार ने नई नीति का हवाला देते हुए मंजूरी देने से इनकार कर दिया।
यूपी के इन शहरों में मेट्रो की योजना पर पड़ सकता है असर
नई मेट्रो नीति के तहत औद्दोगिक नगरी कानपुर व प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के प्रस्ताव को केंद्र की मंजूरी न मिलने पर इलाहाबाद, मेरठ, आगरा व गोरखपुर में मेट्रो रेल की परियोजना लटक सकती है। इलाहाबाद में मेट्रो रेल के लिए दो रूट निर्धारित किए गए है पहला नैनी से शान्तिपुरम और दूसरा धूमनगंज से हाईकोर्ट होते हुए झूंसी तक। तो वही वाराणसी में भी मेट्रो के संचालन का डीपीआर तैयार किया जा चुका था
नई नीति के तहत बनाना होगा डीपीआर
यूपी में सात शहरों में मेट्रो रेल चलाने की योजना है। लखनऊ में पहले चरण में मेट्रो रेल का संचालन शुरु हो चुका है। राज्य सरकार ने पीए मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी व औद्दोगिक नगरी कानपुर का डीपीआर बनाकर केंद्र को भेजा था। वही मेरठ व आगरा में मेट्रो रेल परियोजना के लिए डीपीआर तैयार किया जा चुका था जिसे जल्द ही कैबिनेट मंजूरी के लिए रखा जाना था। जबकि इलाहाबाद व गोरखपुर में मेट्रो रेल परियोजना के लिए डीपीआर बनाने का काम चल रहा है। लेकिन नई नीति के तहत केंद्र ने नए दिशा-निर्देश के आधार पर अब वाराणसी, कानपुर, मेरठ व आगरा से मेट्रो रेल परियोजना के लिए नए सिरे से डीपीआर का प्रस्ताव जल्द मांगा गया है।
Published on:
15 Sept 2017 12:48 pm
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