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गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल फुलवरिया की रामलीला में रावण का हुआ वध, मुस्लिम कलाकारों ने निभाई भूमिका

वाराणसी में विजयादशमी का पर्व मंगलवार को जितनी आस्था के साथ शहरी क्षेत्रों में मनाया गया। उतनी ही आस्था और शिद्दत के साथ बुधवार को ग्रामीण इलाकों में भी दशहरे का पर्व मनाया गया। फुलवरिया की नव चेतना रामलीला समिति ने भी रावण का दहन किया, इसके पहले राम और रावण का भयानक युद्ध हुआ।

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वाराणसी। धर्म की नगरी काशी में जहां बुधवार को माता का विसर्जन हो रहा है। वहीं ग्रामीण अंचलों में आज विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है। इसी क्रम में साल 1992 से हो रही फुलवरिया गांव की बेमिसाल और हिन्दू-मुस्लिम एकता की प्रतिक नवचेतना रामलीला समिति का विजयादशमी का मेला संपन्न हुआ। इस रावण दहन के पहले राम और रावण का भयानक युद्ध हुआ, जिसमें रावण के अअटटहास से पूरा मेला स्थल गूंज उठा। आधे घंटे चले युद्ध के बाद श्रीराम ने रावण की नाभि में भाई विभीषण के बताने पर तीर मारकर उसका मारकर उसका अमृत कलश सूखा दिया और पल भर में ही रावण जमीन में गिर गया। इसके बाद रावण ने राम से क्षमा मांगी और उनसे उद्धार करने को कहा और मरणासन्न हो गया। इस दौरान पूरा मेला स्थल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।

मुस्लिम अध्यक्ष ने रखी थी आधारशिला, अब मुस्लिम बनते हैं पात्र

नव चेतना एवं विकास समिति की इस रामलीला के मौजूदा अध्यक्ष डॉ शिवकुमार गुप्ता ने बताया कि मै इसका संस्थापक हूं और हमारे पहले अध्यक्ष और संस्थापक निजामुद्दीन जी थी जिनके देहांत के बाद उनेक लड़के अब इसमें मंचन कर रहे हैं। इसके अलावा यहां का रावण भी मुस्लिम बंधू ही बनाते हैं। निजामुद्दीन जी का देहांत हुआ उसके बाद ही हम लोगों ने अपना अध्यक्ष बनाया है। उन्होंने कहा कि हम सभी को मुस्लिम-हिन्दू एक साथ होकर चलना होगा तभी समाज का उत्थान और देश का उत्थान होगा।


रावण के पुतले से लेकर राक्षसी सेना में मुस्लिमों का योगदान

निजामुद्दीन हाशमी के पोते आतिफ हाशमी ने बताया कि पहले हमारे दादा इस रामलीला के अध्यक्ष थे। उनके इन्तेकाल के बाद हम लोग भी इस रामलीला के आयोजन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। कभी जामवत तो कभी अंगद, या राक्षसी सेना में कोई पात्र आदि हम लोग हर वर्ष ही निभाते हैं। सभी पवित्रता के साथ यहां लीला का मंचन करते हैं और श्रीराम से आशीर्वाद लेते हैं।

रावण का पुतला जलाने में हुई दिक्कत, मची अफरा-तफरी

इस दौरान वरुणा नदी के किनारे सुबह से खड़ा किया गया रावण ओस की वजह से जलने में मुश्किलें पैदा करने लगा तो उसे मिटटी का तेल छिड़क कर जलाया जाने लगा पर रस्सी जलते ही वह पब्लिक की तरफ गिरा पर रस्सी लगी होने की वजह से बड़ा हादसा होने से टल गया पर कुछ ही देर के बाद पटाखे की चिंगारी पब्लिक पर गिरी जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा।