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वाराणसी में महिला-पुरुष मतदाता अनुपात न्यूनतम से काफी पीछे

मतदाता बनने में रुचि नहीं ले रहीं महिलाएं। जिले के पुरुष-महिला मतदाताओं का अनुपात मानक से नीचे।

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मतदाता प्रतीकात्मक फोटो

मतदाता प्रतीकात्मक फोटो

वाराणसी. एक तरफ जहां केंद्रीय निर्वाचन आयोग ज्यादा से ज्यादा लोगों को मतदाता बनाने में जुटा है। लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी, डीएम से लेकर निर्वाचन कार्यालय तक हर कोई मुस्तैद है फिर भी बनारस में महिला मतदाताओ का अनुपात गड़बड़ा गया है। यहां तक कि न्यूनतम स्तर तक नहीं पहुंच पाया है यह अनुपात।

बनारस की महिलाएं मतदाता बनने को आतुर ही नहीं दिख रही हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा चलाए गए अभियान के तहत रविवार 28 अक्टूबर को बूथों पर अंतिम कैंप लगाया गया। इसमें भी महिलाओं अपेक्षा के अनुरूप नहीं जुट पाईँ। आलम यह है कि सितंबर से ही शुरू इस अभियान में अब तक महज 40 फीसदी महिलाएं ही शामिल हो पाई हैं। यानी 40 फीसदी ने ही मतदाता बनने के लिए आवेदन किया है।

ऐसे में जेंडर रेशियो काफी नीचे गिर गया है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के मानक और बनारस जिले की आबादी (ईपी रेशियो) के हिसाब से एक हजार पुरुषों में 909 महिला मतदाता होनी चाहिए। लेकिन यहां सौ से अधिक बूथों पर यह रेशियो तीन सौ से चार सौ के बीच ही है। ऐसे में अब यह माना जा रहा है कि सितंबर से लेकर अब तक जो अभियान चलाया गया उसमें बीएलओ ने महिला मतदाता बनाने की दिशा में खास रुचि नहीं ली। इस सूरत में जिला निर्वाचन अधिकारी, जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने महिला मतदाताओं की तादाद बढ़ाने के लिए आशा कार्यकर्ती, आंगनबाड़ी कार्यकर्ती,एएनएम, रोजगार सेवक,कोटेदार और एनवाईईके के स्वयंसेवकों को इस कार्य में लगाने का निर्णय लिया है।

जिले का हाल
-कुल मतदाता-28 लाख से ज्यादा
-मतदान केंद्र-1140
-बूथ जिन पर महिला मतदाताओं की संख्या मिली है कम-160
-महिला-पुरुष मतदाता का मानक-1000: 909
-न्यूनतम मानक-700
-31 अक्टूबर तक चलना है अभियान
-39041 ने किया है नए वोटर बनने के लिए आवेदन

सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी दयाशंकर उपाध्याय का कहना है कि पुरुष-महिला मतदाता अनुपात दुरुस्त करने के लिए नये सिरे से काम किया जा रहा है। विभाग की कोशिश है कि बनारस में भी आधी आबादी को उचित प्रतिनिधित्व मिले।