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विश्व बाजार में बनारस के G.I. उत्पादों की होगी धूम

वाणिज्य सचिव ने बनारसी ब्रोकेड एवं साड़ी के 75 बुनकरों को दिया जीआई अथाराईज्ड यूजर प्रमाणपत्र. जीआई प्रोडक्ट कैटलॉग एवं जीआई फिल्म का किया विमोचन. 

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Ajay Chaturvedi

Oct 05, 2016

Post GI consultation program

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वाराणसी.
परंपरागत हस्तशिल्प, हथकरघा एवं अन्य उत्पादों को बचाने और बढ़ाने में जी.आई. (भौगोलिक संकेतक) कानूनी महत्वपूर्ण हथियार है। इसके द्वारा नकली उत्पादों से लड़ा जा सकता है। देश की बौद्धिक संपदा का दर्जा प्राप्त होने से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर साख बढ़ती है तथा गुणवत्ता वाले उत्पाद सही मूल भौगोलिक स्थान से पहचाने जाते हैं। उत्पादकों को ही असली मुनाफा प्राप्त होता है। रोजगार के साथ स्वावलम्बन आता है। निर्यात में इजाफा होता है। देश की परंपरागत चीजें संरक्षित रहती हैं, जिससे राष्ट्र समृद्ध होता है। यह कहना है वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया का। वह बुधवार को वाराणसी के कैंटोन्मेंट क्षेत्र स्थित एक होटल में आयोजित समारोह को संबोधिीत कर रही थीं।


उन्होंने कहा पूरी दुनिया में भारत की पहचान हस्तशिल्प, हथकरघा एवं परंपरागत उत्पादों के कारण है। इस प्राचीन विरासत को बचाने और बढ़ाने से ही सस्टनेबुल डेवलपमेंट होगा। संयुक्त राष्ट्र ने पांच वर्षों के लिए सस्टनेबुल डेवलपमेंट गोल का निर्धारण किया है। ऐसे समय में विविधिता से भरे इस देश में जी.आई. पंजीकरण की अपार संभावनाएं हैं। सुश्री तेवतिया ने ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आईका एवं वीएसओ के सहयोग से आयोजित पोस्ट जीआई कंसल्टेशन प्रोग्राम को संबोधित करते हुए कहा कि शिल्पियों, बुनकरों, एवं अन्य उत्पादकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। मेक इन इंडिया, डिजिटिल इंडिया, स्किल इंडिया से जीआई को सीधे जोड़कर व्यापक स्तर पर जागरूकता एवं प्रचार के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में वाराणसी एवं देश की जीआई पंजीकृत बौद्धिक सम्पदा को बढ़ाया जाएगा।


मुख्य अतिथि ने बनारस ब्रोकेड एवं साड़ी के 75 बुनकरों को जीआई अथाराईज्ड यूजर का प्रमाणपत्र दिया। साथ ही जीआई प्रोडक्ट कैटलाग एवं जीआई फिल्म का विमोचन किया। कहा कि इससे व्यापक प्रचार-प्रसार होगा तथा शिल्पियों के पास अपनी कला को बताने के लिए कैटलाग एवं फिल्म प्रमाण के रूप में सहयोग करेंगी। इस मौके पर उत्कृष्ट श्रेणी के जीआई उत्पादों को भी प्रदर्शित भी किया गया।


विशिष्ट अतिथि कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने कहा कि यह अत्यंत गर्व का विषय है कि वाराणसी में देश के सर्वाधिक जी.आई पंजीकृत बौद्धिक सम्पदा अधिकार मौजूद है, जिससे उत्पादकों को लाभ मिल रहा है। बनारस में कुल सात हस्तशिल्प एवं हथकरघा उत्पादों का जी.आई. पंजीकरण कराकर देश की बौद्धिक सम्पदा अधिकार में शामिल किया जा चुका है एवं तीन हस्तशिल्प जी.आई. पंजीकरण के लिए भेजे जा चुके हैं।


जीआई प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले मु. इसराइल, अकरमअली, बाबूलाल, हाफिज सगीरअहमद, असरफअली, सावित्री देवी, नूरबीबी सहित यूपिया, इंडो-अमेरिकन, सीईपीसी, एकमा के प्रतिनिधि तथा गोदावरी सिह, प्रेमशंकर, कुंजबिहारी, प्यारेलाल, अनिल कसेरा, रमजानअली, सुनिल कुमार, संतोष, शशिकान्त आदि जीआई रजिस्टर्ड प्रोपराईटर, राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिल्पी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रजनीकान्त ने किया।


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