
Varanasi News : बनारस के हस्तशिल्पी राकेश मौर्या संत कबीर अवार्ड से सम्मानित
वाराणसी। हुनरबाजों के शहर बनारस में हस्तशिल्प का काफी महत्त्व है। यहां के हस्तशिल्पियों को सरकार भी बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में हुए भव्य समारोह में वाराणसी के कछवां रोड के पूरे गांव के राकेश मौर्या को प्रतिष्ठित संत कबीर अवार्ड से सम्मानित किया है। यह अवार्ड हस्तशिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर दिया जाता है।
हस्तनिर्मित पंजा दरी के आर्टिजन है राकेश
प्रधानमंत्री के सांसद आदर्श गांव पूरे के रहने वाले राकेश मौर्या स्नातक हैं और उन्होंने पॉलिटेक्निक किया है। राकेश ने बताया कि इसके बाद मुंबई जाकर प्राइवेट जॉब करने लगा। वहां मन न लगने पर वापस घर लौट आया और हस्तशिल्प जो की पुश्तैनी कार्य है। उसमे लग गया। घर में हस्तनिर्मित पंजा दरी का काम होता है। पिछले पांच वर्ष से इसी काम में जुड़े हुए हैं।
रानी लक्ष्मीबाई की बनाई थी 32 रंगों से दरी पर कलाकृति
उन्होंने बताया कि इस दौरान मैंने साल 2019-20 में पांच गुणा आठ फिट चौड़े और लंबे दरी पर पंजा विधि से 32 रंगों से मर्दानी रानी लक्ष्मीबाई की कलाकृति बनायी थी, जिसे बनाने में दो लाख रुपये का खर्च आया था।
इनाम स्वरुप मिली शील्ड और एक लाख रुपये
राकेश मौर्या को मुख्यमंत्री ने लोक भवन में आयोजित प्रोग्राम में शील्ड और एक लाख रुपये का चेक देकर सम्मानित किया। प्रथम पुरस्कार पाकर राकेश मौर्या काफी खुश दिखाई दिए। उन्होंने सरकार और जीआई विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ रजनीकांत का धन्यवाद दिया।
क्या है पंजा दरी
पंजा दरी की खासियत है कि यह बहुत खूबसूरत होती है और मजबूत होती है। ये कई साल तक खराब नहीं होती। इसका नाम पंजा दरी इसलिए पड़ा क्योंकि ये हाथ से बनायी जाती है। एक पंजा दरी बनाने में कम से कम तीन से चार दिन लगते हैं। दरी का साइज बड़ा हो तो 20 दिन से ज्यादा समय भी लग सकता है। यह दरी पूरी तरह कॉटन से बनाई जाती है और इसमें रंग भी हाथों से भरा जाता है।
Updated on:
01 Apr 2023 09:17 am
Published on:
01 Apr 2023 08:50 am
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