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Varanasi News : वाराणसी के बहुचर्चित संवासिनी कांड में आरोपी बनाए गए कांग्रेस नेताओं के समर्थन में उस वर्ष वाराणसी आयुक्त कार्यालय में धरना और तोड़फोड़ मामले में कांग्रेस के बड़े नेता फंसते दिखाई दे रहें हैं। वाराणसी कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला के खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) इश्यू कर दिया है। कांग्रेस नेता के अधिवक्ता के अनुसार उसके क्लाइंट का नाम इस केस में फर्जी तरीके से डाला गया है जबकि प्राथमिकी में उनका नाम ही नहीं है।
डिस्चार्ज के लिए दी थी एप्लिकेशन
रणदीप सुरजेवाला के अधिवक्ता ने बताया कि कांग्रेस नेता ने आज खुद को इस केस से डिस्चार्ज करने का प्रार्थना पत्र डाला था, क्योंकि प्राथमिकी में कांग्रेस नेता का नाम नहीं अंकित है। यहां तक की केस डायरी में भी जिक्र नहीं है फिर भी फर्जी ढंग से उनके विरुद्ध आरोप पत्र डाला गया और कोर्ट ने उनके लिए डाली गई डिस्चार्ज यानी इस मुकदमे से नाम हटाने की एप्लिकेशन खारिज कर दी और गैर जमानती वारंट भी इश्यू कर दिया है।
क्या हुआ था उस दिन
आरोप है कि संवासिनी गृह कांड में कांग्रेस नेताओं को जबरदस्ती फंसाने का आरोप लगाते हुए 21 अगस्त 2000 को ततकालीन राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रणदीप सुरजेवाला और कार्यकर्ताओं ने मंडलायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया था। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने तोड़फोड़ भी की थी और मौके पर पहुंची पुलिस से काफी खींचातानी हुई थी, जिसपर यह मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस दौरान लाठीचार्ज और पथराव भी हुआ था।
क्या था संवासिनी कांड ?
शिवपुर स्थित नारी संरक्षण गृह (संवासिनी गृह) की संवासिनियों से अनैतिक देह व्यापार की सूचना पर साल 2000 में वाराणसी में हड़कंप मच गया था। संवासिनी गृह से भागी एक 12-13 साल की संवासिनी ने जब इस बात की सूचना दी तो वाराणसी से लखनऊ तक प्रशासनिक अमले के फोन घनघनाने लगे। जांच हुई और तत्कालीन एसीएम फोर्थ की रिपोर्ट पर 24 मई 2000 को एफआईआर दर्ज कर ली गयी। इस मामले में सीबीआई ने जांच की और अंत में सभी को क्लीन चिट दे दी।
Published on:
03 Jun 2023 07:28 pm
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