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Varanasi News : गांधी विद्या संस्थान की जमीन इंदिरा गांधी कला केंद्र को देने का विरोध, जानिए बनारस में क्यों हो गई गोडसे की गांधी से तुलना

Varanasi News : सर्व सेवा संघ के अंदर मौजूद गांधी विद्या संस्थान की आधारशिला 1962 जयप्रकाश नारायण ने रखी थी और वो इसे ऑक्सफोर्ड जैसा बनाना चाहते थे पर कालांतर में कुछ विवाद को लेकर इसका रजिस्ट्रेशन खत्म होने के बाद साल 2007 में पूरी तरह बंद हो गया। इसकी लाइब्रेरी में आज भी कई महत्वपूर्ण अभिलेख सुरक्षित हैं।

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Varanasi News : काशी के राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ पहुंचे भारत जोड़ो यात्रा का समर्थन करने वाले सोशलिस्ट और चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव ने बिना किसी का नाम लिए प्रधानमंत्री पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा की देश में 'देश में गांधी जी के नाम, विरासत और विचार की हत्या करने का सुनियोजित प्रयास चल रहा है।' उन्होंने आगे कहा कि गांधी कई लोगों के गली की हड्डी बने हुए हैं।

गांधी कई लोगों के गले की हड्डी

योगेंद्र यादव ने सर्व सेवा संघ के डाक बंगले में आयोजित प्रेस वार्ता में एक सवाल के जवाब में कहा कि गांधी जी कई लोगों के गली की हड्डी बने हुए हैं। वो मरने के पहले भी थे और अब अत्याधिक हो गए हैं, लेकिन इस देश की आस्था गांधी जी के प्रति इतनी है कि कोई उनपर सीधा हमला नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज लोग देश में कितना भी गोड़से का नाम ले लें पर आस्ट्रेलिया जाने पर यह कहना पड़ता है कि गांधी के देश से आया हूं।

गांधी के नाम को मैला करने का चल रहा सुनियोजित प्रयास

सर्व सेवा संघ में मौजूद गांधी विद्या संस्थान की जमीन मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा द्वारा डीड के विपरीत जाकर इस जमीन को सर्व सेवा संघ की जगह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र को देने के विरोध में योगेंद्र यादव प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज भी देश के जनमानस में और दुनिया की आत्मा में गांधी की आस्था है। इसलिए आप उनपर सीधा हमला नहीं कर सकते हैं। इसलिए इन लोगों ने गांधी, उनकी विरासत में कब्जा करने और उनका नाम मैला कर रहे हैं ताकि उनपर कोई हमला करे तो कोई विरोध न करे और उसका सुनियोजित प्रयास चल रहा है।

नए संसद भवन के उद्घाटन के दिन पर दिया बयान

इस दौरान योगेंद्र यादव ने कहा कि 'यह संयोग नहीं कि आज देश के नए संसद भवन का उद्घाटन किया गया। आज सावरकर का जन्मदिन भी है। ऐसे व्यक्ति का जन्मदिन जिसने स्वयं को खुद वीर की उपाधि दी और उसे खुद की जीवनी लिखनी पड़ी। उसके लिए यह सोच समझ के आज किया गया। यह संयोग नहीं है ये लोग धीरे-धीरे कदम उठा रहे हैं ताकि गाँधी के जो नाम लेवा बचे हैं और जो भी संस्थान गांधी के नाम की याद दिलाते हैं। उसे अंदर से मैला करने की साजिश चल रही है।

किया गया गैरकानूनी काम

उन्होंने आगे कहा कि इन लोगों ने साबरमती आश्रम को टूरिस्ट रिजॉर्ट बना दिया है, उसके सामने से यदि गांधी जी भी अब गुजरेंगे तो नहीं रुकेंगे। गांधी की स्मृतियों को खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मै भी गांधी विद्या संस्था की बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में था पर किसी कारण आज वह समाप्त हो चुका है। कानून कहता है और सेल डीड कहती है कि गांधी विद्या संस्थान किसी भी कारणवश समाप्त होगा तो यह स्थान वापस सर्व सेवा संघ को मिल जाएगा। इसका मामला मंडलायुक्त महोदय को दिया गया था की जो विवाद है उसको सुलझाएं पर उन्होंने किसी अन्य संस्था यह सुपुर्द कर दिया जो की गैरकानूनी है।

बनारस में सारे फोन दिल्ली से आते हैं

योगेंद्र यादव ने कहा कि इसमें मंडलायुक्त की गलती नहीं है क्योंकि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी गलत कागज पर कोई फैसला नहीं ले सकता है, जब तक ऊपर से कोई फोन न आए और बनारस में तो सभी फोन दिल्ली से आते हैं। यह खेल पहली नजर में प्रशासन की गड़बड़ी लग रही है पर थोड़ा सा कुरेद के देखें तो इसपर गिद्ध दृष्टि भूमाफियाओं, कुछ राजनीतिक लोगों आदि की नजर है।