
श्रीराम जन्मभूमि के प्रमुख पक्षकार प्रो. ठाकुर प्रसाद वर्मा का निधन
वाराणसी. श्रीराम जन्मभूमि के प्रमुख पक्षकार रहे प्रो. ठाकुर प्रसाद वर्मा (85) के निधन हो गया। इनकी मौत बनारस के लिए बड़ी क्षति है। देश के बड़े इतिहासकारों में शामिल प्रोफ़ेसर ठाकुर प्रसाद वर्मा से देश ही नहीं दुनिया के बड़े इतिहास के जानकार सलाह लिया करते थे। शिक्षा और धर्म जगत से जुड़े लोगों ने शोक जताते हुए उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया। बीएचयू में प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के आचार्य प्रो. वर्मा की हरिश्चंद्र घाट पर अंत्येष्टि की गई। बेटे सिद्धार्थ ने उन्हें मुखाग्नि दी।
आठ अप्रैल, 2002 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश व श्रीराम जन्मभूमि के प्रमुख पक्षकार देवकी नंदन अग्रवाल के निधन के बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ठाकुर प्रसाद वर्मा ने श्रीराम जन्मभूमि के प्रमुख पक्षकार की भूमिका निभाई प्रो वर्मा इस पद और 2010 तक रहे। वर्मा के इस पद से रिटायर होने के बाद से त्रिलोकी नाथ पांडेय ने सखा के पद को संभाला। राम जन्मभूमि मामले के पक्षकार होते हुए वर्मा ने अपनी विद्वता का लोहा दुनियां को मनवा दिया।
बीएचयू में इतिहास विभाग में प्रो पद से 1992 में रिटायर होने के बाद वह अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के प्रमुख स्तंम्भ रहे। उन्होंने अयोध्या में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विरोधियों के समक्ष श्रीराम जन्मभूमि एवं उनकी वंशावली प्रस्तुत की थी। काशी विद्यापीठ प्रोफेसर ओपी सिंह ने कहा की उनका निधन इतिहास जगत के लिए बड़ी क्षति है
मोहनजोदड़ो की मूर्ति को लेकर भी उठाये थे सवाल :- कुछ साल पहले भी प्रो वर्मा ने भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद की 'इतिहास' नाम की पत्रिका में डालने एक रिसर्च में लिखा था की मोहनजोदड़ो की पहचान बनने वाली मूर्ति 'डांसिग गर्ल' देवी पार्वती हैं। उन्होंन 'वैदिक सभ्यता के पुरातत्व' का हवाला देते हुए अपनी बात लिखी थी। प्रोफेसर वर्मा ने इस रिसर्च में लिखा था कि मोहनजोदड़ो के अवशेषों में इस बात के भी प्रमाण है कि उस समय भगवान शिव की पूजा होती थी। उनके इस दावे के बाद भी दुनियाभर के कई इतिहासकारों में बहस छिड़ गई थी। ऐसे एक दो नहीं कई ऐसे मौके आये जब वर्मा ने काशी को ख्याति दिलाई।
Published on:
09 May 2020 06:01 pm
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