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जन सूचना का अधिकार कानून के तहत सही जानकारी नहीं दी जा रही PM मोदी के संसदीय क्षेत्र में

संबंधित सभी विभागों से सूचना एकत्र करने की बजाय एक विभाग से जानकारी मांग कर किया जा रहा है गुमराह।

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Noida

आरटीआई प्रतीकात्मक फोटो

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में जनसूचना का अधिकार कानून का खुलेआम माखौल उड़ाया जा रहा है। आलम यह है कि जन सूचना अधिकारी कार्यालय से अगर कोई सूचना मांगी जाती है तो वो उससे संबंधित विभागों से संपूर्ण जानकारी मंगाने की बजाय किसी एक विभाग को पत्र जारी कर उससे जानकारी उपलब्ध कराने को निर्देशित करते हैं जहां से यह जवाब दे दिया जाता है कि संबंधित जानकारी इस विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। ऐसा ही एक वाकया हाल में एक आरटीआई के माध्यम से मांगी गई सूचना के बाबत सामने आया है। इसका खुलासा तब हुआ जब कांग्रेस नेता अनिल श्रीवास्तव 'अन्नु' ने 14 सितम्बर 2017 को एक आरटीआई लगाकर जिला प्रशासन से जानकारी मांगी। जनसूचना अधिकार कानून के तहत मांगी गई सूचना के तहत पूछा गया था कि मई 2014 से अब तक वाराणसी जनपद के विकास कार्यों के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा कितना धन आवंटित हुआ और कहां-कहां खर्च किया गया ? इसके जवाब में जनसूचना अधिकारी वाराणसी ने जिला विकास अधिकारी के हवाले से तीन अक्टूबर 2017 को बजरिए रजिस्टर्ड डाक बताया कि आप द्वारा चाही गई सूचना इस कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।

आलम यह है कि एक तरफ जहां केंद्र व राज्य सरकार विकास कार्यों और उसके लिए आवंटित धनराशि की पारदर्शिता का ढिंढोरा पीट रही। डिजटलाइजेशन का राग अलापा जा रहा है। वहीं आलम यह है कि कोई नागरिक अगर जनसूचना का अधिकार कानून के तहत जन सूचना अधिकारी, कलेक्ट्रेट से यह जानना चाहता है कि मई 2014 से अब तक केंद्र व राज्य सरकार द्वारा वाराणसी के विकास के मद में कितनी धनराशि आवंटित की गई और वह धनराशि किस-किस मद में कहां-कहां खर्च की गई तो जन सूचना अधिकारी उस सूचना के लिए आवेदन पत्र को जिला विकास अधिकारी के पास भेज कर आवेदक को सूचना मुहैया कराने का निर्देश देते हैं और जिला विकास अधिकारी सूचना मांगने वाले को एक पत्र जारी कर यह कह देते हैं कि ऐसी सूचना उनके दफ्तर में नहीं है। यहां यह बता दें कि जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) का जवाब भी पूरी तरह से सही नहीं है। दरअसल यह सच है कि किसी जिले के संपूर्ण विकास की जानकारी केवल डीडीओ नहीं दे सकते। इसके लिए सीडीओ, जिला पंचायती राज कार्यालय, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, बिजली विभाग, विकास प्राधिकरण के साथ डीआरडीए से हासिल करनी होती है। सांसद व विधायक निधि की जानकारी डीआरडीए से मिलती है जबकि ग्रामीण क्षेत्र के विकास की जानकारी सीडीओ दफ्तर से मिलेगी और शहरी क्षेत्र के लिए नगर निगम, विकास प्राधिकरण और संबंधित विभागों से। लेकिन जब जन सूचना अधिकारी, कलेक्ट्रेट से यह सूचना मांगी जा रही हो तो उसका दायित्व होता है कि वह सभी संबंधित विभागों से जानकाकरी मंगा कर आवेदक को उपलब्ध कराए। लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया।

इस संबंध में कांग्रेस नेता अनिल श्रीवास्तव 'अन्नु' ने पत्रिका से बातचीत में यह बताया कि उन्होंने 14 सितम्बर 2017 को आरटीआई के माध्यम से जिला सूचना अधिकारी, कलेक्ट्रेट से जनसूचना अधिकार कानून के पूछा था कि मई 2014 से अब तक वाराणसी जनपद के विकास कार्यों के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा कितना धन आवंटित हुआ और कहां-कहां खर्च किया गया ? इस पर जन सूचना अधिकारी (अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय) ने जिला विकास अधिकारी को पत्र फार्वर्ड करते हुए आवेदक को संबंधित सूचना से अवगत कराने को कहा जिस पर जिला विकास अधिकारी ने आवेदक को जवाब भेजा कि उनके कार्यालय में इस तरह की सूचना उपलब्ध नहीं है। डीडीओ का रजिस्टर्ड डाक से भेजा गया यह पत्र जब अनिल श्रीवास्तव को मिला तो वह हैरत में पड़ गए। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि एक ओर केंद्र में बीजेपी सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री व केंद्रीय मंत्री तथा राज्य सरकार वाराणसी के विकास के लिए अनगिनत योजनाओं व कार्यों का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर उन विकास कार्यों पर खर्च होने वाली धनराशि के आवंटन की जानकारी मांगने वाले को यह जवाब दिया जा रहा है।

कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि इससे तो दो ही बातें स्पष्ट होती हैं कि या तो सभी घोषणाएं हवा हवाई हैं अथवा केंद्र व राज्य सरकार ने धन आवंटन का रास्ता या तरीका भी बदल दिया है। कांग्रेस नेता ने आरटीआई से प्राप्त जवाब की छायाप्रति सार्वजनिक करते हुए वाराणसी के सांसद व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व राज्य सरकार से सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि वह बताए कि मई 2014 के बाद वाराणसी में कौन कौन सी विकास योजनाएं स्वीकृत हुई हैं और उनके लिए कितना धन आवंटित किया गया है और कहां कहां खर्च हुआ है अन्यथा यह समझा जायेगा कि काशी की जनता संग धोखा किया गया ।


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