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वाराणसी का संवासिनी गृह कांड, जिसकी जद में आये कई सफेदपोश, सीबीआई ने की जांच, 23 साल बाद फिर चर्चा

Varanasi sanvasini Grih case : मई 2000 में हुए संवासिनी गृह कांड ने नेशनल स्तर पर सुर्खियां बटोरीं थीं।

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Varanasi sanvasini Grih case

Varanasi sanvasini Grih case

वाराणसी। शिवपुर स्थित नारी संरक्षण गृह (संवासिनी गृह) की संवासिनियों से अनैतिक देह व्यापार की सूचना पर साल 2000 में वाराणसी में हड़कंप मच गया था। संवासिनी गृह से भागी एक 12-13 साल की संवासिनी ने जब इस बात की सूचना दी तो वाराणसी से लखनऊ तक प्रशासनिक अमले के फोन घनघनाने लगे। जांच हुई और तत्कालीन एसीएम फोर्थ की रिपोर्ट पर 24 मई 2000 को एफआईआर दर्ज कर ली गयी। इस मामले में सीबीआई ने जांच की और अंत में सभी को क्लीन चिट दे दी।

आखिर क्या था ये प्रकरण
साल 2000 में ऐसा क्या हुआ था जो वाराणसी अखबारों की सुर्खियां बना हुआ था। इस बारे में patrika.com ने प्रदेश के पूर्व तेज तर्रार आईएएस ऑफिसर और वाराणसी के तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट कैप्टन आर विक्रम से बात की। कैप्टन आर विक्रम ने बताया कि उस समय का ये बिग स्कैंडल था क्योंकि एक लड़की ने पुलिस को इस बात की सूचना दी थी कि संवासिनी गृह की लड़कियों से अनैतिक देह व्यापार कराया जाता है और उन्हें संवासिनी गृह से बाहर भेजा जाता है।

तत्कालीन एएसपी जीके गोस्वामी को मिली थी विवेचना
रिटायर्ड आईएएस कैप्टन आर विक्रम ने बताया कि यह मामला जंगल में आग की तरह फैला और इसकी विवेचना तत्कालीन एएसपी जीके गोस्वामी को दी गयी। उन्होंने विवेचना की। विवेचना पूरी हुई तो उन्होंने 14 आरोपितों के खिलाफ अनैतिक देह अधिनियम की धारा 3, 4, 5, 6, 8, 9 तथा 15 के तहत अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। इनमें कुछ नामचीन लोगों और पुलिस अधिकारियों को भी आरोपित किया गया था।

कई व्यापारी और सफेदपोशों के नाम आये थे सामने
तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट कैप्टन आर विक्रम ने बताया कि 12-13 साल की लड़की जिसका मुझे नाम भी नहीं अब याद है। उसके बयान और शहादत के आधार पर कई लोगों का नाम इस मामले में सामने आया था। कई व्यापारी, बिजनेसमैन और सफेदपोश इसमें सामने आये थे। उन्होंने बताया कि इस मामले में वहां की अधीक्षिका श्यामा सिंह को जेल भेज दिया गया था।

लड़की ने किया गुमराह
रिटायर्ड आईएएस कैप्टन आर विक्रम ने बताया कि वह लड़की जब मेरे समाने बयान के लिए लायी गयी तो उसने कहा कि उसे अपना घर याद है। इसपर मैंने मानवता वश कैंट थाने की एक जीप, महिला कांस्टेबल, एक सब इंस्पेक्टर और संवासिनी गृह की कर्मचारियों को उसके साथ बलिया भेजा। वहां कई दिनों तक उसने हमारी टीम को गुमराह किया। वो एक स्कूल में घुसी और कहा की मेरा स्कूल है लेकिन किसी ने उसे वहां पहचाना नहीं। उसके बाद एक मकान के समाने रुकी और बोली मेरा घर है पर उन लोगों ने भी उसे अपनी बेटी मानने से इंकार कर दिया। कुछ दिन बाद उसका पिता खुद आया और उसने बताया कि यह घर से भाग गयी थी और हम ढूंढ रहे थे।

पत्रकारों ने की थी संवांसिनियों से बात
कैप्टन आर विक्रम ने बताया कि इस मामले में कई सारी खबरें मीडिया में चल रही थीं। ऐसे में सभी पत्रकारों को शिवपुर संवासिनी गृह ले जाया गया जहां लोगों ने संवासिनियों से बातचीत की। वहां की वर्कर्स से बात की। खाने-पीने की व्यवस्था, सोने और शौचालय की व्यवस्था देखी। सभी इससे संतुष्ट दिखाई दिए थे। किसी भी संवासिनी ने देह व्यापार जैसी बात नहीं कही थी।

कौन हैं रिटायर्ड आईएएस कैप्टन आर विक्रम
कैप्टन राघवेंद्र विक्रम सिंह सेना से रिटायर हुए और उसके बाद प्रशासनिक सेवा में आये। प्रमोट हुए और आईएएस रैंक मिली। 30 अप्रैल 2018 में प्रशासनिक सेवा से रिटायर हुए कैप्टन आर विक्रम सिंह की जनवरी 2018 में बरेली जनपद के जिलाधिकारी रहते हुए की गयी एक पोस्ट ने हड़कंप मचा दिया था।