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बनारस की महिलाओं का बेमिसाल बैंक, कारोबार करोड़ों का

ये है ग्रामीण इलाके की महिलाएं जिन्होंने कभी खोला था सूदखोरों के खिलाफ मोर्चा, अब बहा रहीं महिला सशक्तिकरण का की बयार।

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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं

स्वयं सहायता समूह की महिलाएं

वाराणसी. एक वक्त था जब बनारस के गांवों में रहने वाली ये महिलाएं घर की चहारदीवारी में कैद थीं। कभी सोचा भी नहीं था कि वह चौकठ लांघ पाएंगी। घर की माली हालत बदतर थी। सूदखोरों के मकड़जाल में पीढ़ियां गुजर गईं। कर्ज था कि कभी कम होने का नाम नहीं लेता था, बल्कि ये कहें कि मूल का मूल, सूद भी लगातार बढ़ता जाता था। घर द्वार, जमीन, जेवर सब गिरवी रख दिया फिर भी दो वक्त की रोटी के लाले पड़े रहते थे। लेकिन इस घुटन से तड़पती महिलाओं के लिए वह दिन भी आया जब इन्होंने न केवल चौकठ लांघी बल्कि गांव में ही अपनों को एकजुट कर समूह तैयार किया और आर्थिक सशक्तिकरण का महा अभियान छेड़ा। उनके इस काम में इनकी मदद की ह्युमेन वेलफेयर एसोसिएशन ने। तब से अब तक दो दशक बीत गए। इनके अपने खोले बैंक ने सात करोड़ से ऊपर का कारोबार कर लिया है। अब ये भी खुश हैं और इनका परिवार भी।

बता दें कि इस महाअभियान से अब तक बनारस की 3750 महिलाएं जुड़ चुकी हैं। यहां यह भी बता दें कि इनके बैंक का कारोबार जहां सात करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच चुका वहीं कोई एनपीए भी नहीं है इन महिला स्वयंस सहायता समूहों पर। ऐसे में जब इन महिलाओं ने सुना कि उनके सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की स्वयं सहायता की महिलाओं को संबोधित कर रहे हैं तो इन्होंने खुद को गौरवान्वित महसूस किया। सबसे बड़ी बात यह कि इन महिलाओं को न किसी सब्सिडी की जरूरत है न किसी तरह की छूट की। बस लालसा है तो इतनी कि हर महिला स्वरोजगार से जुड़े, स्वावलंबी हो कर सम्मानपूर्वक जीए। अन्य निर्बलों की सबला बने तभी जा कर असल महिला सशक्तिकरण होगा और देश आगे बढ़ेगा।

नबार्ड के स्थापना दिवस समारोह के तहत चिरईगांव विकास खंड में सात दिवसीय फूल और सब्जी खेती की उत्पादकता के समापन के मौके पर मवइया स्थित रिसोर्स सेंटर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के निदेशक डॉ रजनीकांत ने कहा कि सूदखोरों के चंगुल से मुक्ति और गरीब महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में संस्था ने नाबार्ड के सहयोग से जिले में स्वयं सहायता समूहों ने अपनी जड़ों को मजबूत करना शुरू कर दिया है और ईशक्ति के माध्यम से सभी समूह नाबार्ड के डिजिटल पोर्टल से जुड़े हैं जो अपने आप में डिजिटल इंडिया का मजबूत उदाहरण है।


इस मौके पर माधुरी सिंह, चंदा देवी, निर्मला देवी, सरिता देवी, संतारा, सरिता सिंह, कलावती, कमली, बेबी, पुष्पा, गीता, सरोज, चिंता, मधु, शकुंतला, सुशीला, श्यामकुमारी, सरोज, गुड्डी, उषा, धनवंती, शुभावती, शैल कुमारी, हेमा सोनकर, अनीता देवी, सबिता देवी, उषा मौर्या, दिनेश मौर्या आदि मौजूद रहे।