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कौन न हो जाए पूर्वांचल की इस कला का मुरीद, एक झलक पड़ते ही टिक जाती हैं निगाहें

जरदोरी हो या ग्लास बीड्स या हो गुलाबी मीनाकारी, बस देखते रह जाएंगे।

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Varnasi and Purvanchal handloom artists Domination growing

Varnasi and Purvanchal handloom artists Domination growing

वाराणसी. आखिर कोई क्यों न हो काशी और पूर्वाचल की कलाकारी पर फिदा। अंगुलियों के करतब को देख बड़े-बड़े हो जाते हैं उसके मुरीद। वैसे तो ये कलाकारी पुश्तैनी है, लेकिन हाल के वर्षों में इसे नया मुकाम हासिल हुआ है। वाराणसी, रामनगर, भदोही, गाजीपुर के कलाकारों ने अपनी मेहनत से पूर्वांचल का नाम दुनिया भर में रोशन किया है। अब इनकी कलाओं को संरक्षण भी मिल रहा है। इसके संवर्धन के पुख्ता इंतजाम भी किए जा रहे हैं। ऐसे में इन कलाकारों का भी मनोबल बढा है। अब जब प्रयागराज में अगले साल लगने वाला अर्द्ध कुंभ हो या प्रवासी भारतीय सम्मेलन, इन दोनों में ही पूर्वाचंल की इस कला के प्रदर्शन की तैारी है।

अब चाहे वो लकडी के खिलौने हों या ग्लास बीड्स या गुलाबी मीनाकाकरी अथवा जरदोरी इन सभी कलाओं में पारंगत हासिल कर चुके कलाकारों की प्रदर्शनी तो बडा लालपुर स्थित ट्रेड फेसिलिटी सेंटर में भी लगी है जिसे देख लोग दांतों तले अंगुली दबा ले रहे हैं। महिला शिल्पी पुष्पा मौर्या के लकड़ी के खिलौने, ज्योती के ग्लास बीड्स और निकिता सिंह के गुलाबी मीनकारी तथा प्यारेलाल मौर्या की दरी, सादाब आलम की ज़रदोजी, कैसर जहां का वॉल हैंगिंग, चंद्रप्रकाश का वुड कार्विंग, वच्चा लाल मौर्या का स्टोन क्राफ्ट में लाइव डिमोन्सट्रशन सब एक से बढ कर एक। निर्णय करना हो कि किसे बेहतर कहें तो मुश्किल में पड़ जाएंगे। ये सभी विशेष आकर्षण का केंद्र है। ज़रदोजी से बनी भगवान श्रीनाथ जी की 07 फुट बड़ी प्रतिमा देख लोग बरबस ही नतमस्तक हो जाएंगे।

जीआई एक्सपर्ट डॉ रजनी कांत कहते है कि चंद्रप्रकाश वुड कार्विंग, वच्चा लाल मौर्या स्टोन क्राफ्ट में लाइव डिमोन्सट्रशन करेंगे तो एक सभी जी आई क्राफ्ट को जिनपर प्रवासीय भारतीय दिवस, ओडीओपी, कुम्भ और नेशनल जीआई लोगो बनाया गया है जो विशेष आकर्षण का केंद्र है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी आगमन पर बनारस सहित पूर्वांचल के हस्तशिल्पिओ और बुनकरों ने अपनी कला का नमूना पेश किया जिसे देख वह भी अभिभूत हो उठे। प्रधानमंत्री के लिए चंदापुर, लोहता की महिलाओं ने बड़े मनोयोग से ओडीओपी के लोगो को अंगवस्त्रम पर उकारा था तो कबीरचौरा निवासी, स्टेट अवार्डी संजय कुमार, मेटल रिपोसी क्राफ्ट पर लोगो इमबोस और मीना कर के मोमेंटो तैयार किया था तो स्टेट अवार्डी रामकटोरा निवासी चंद्र प्रकाश विश्वकर्मा ने वुड कार्विंग कला से कमल के ऊपर नक्काशी कर के मोमेंटो भेट किया। कॉफी टेबुल बुक के लिए सारनाथ निवासी पप्पूजी हैंडलूम ब्रोकेड का कवर बनाया।

डॉ रजनी कांत ने बताया कि चंदापुर, लोहता निवासी, आफरीन, दिव्या, रेशमा, सहना जैसी युवा महिला शिल्पियों ने ज़रदोज़ी का अंगवस्त्र बनाया जो अद्भुत ह। इस अंगवस्त्र को पहले हैण्डलूम पर छाही गांव के बच्चा लाल मौर्या ने बुनाई किया फिर महिला शिल्पिओ द्वारा ज़रदोज़ी से तैयार किया।

उऩ्होंने बताया कि जीआई पविलियन, ओडीओपी स्टाल और लाइव डिमांसट्रेशन से शिल्पिओ और बुनकरों में अभूतपूर्व उत्साह रहा। यहां के हस्तशिल्प और हथकरघा की विशिष्टताओ और उनपर तैयार किए गए प्रवासी भारतीय दिवस लोगो, अर्द्ध कुंम्भ लोगो, ओडीओपी लोगो को बारीकी से दिखाया, जिसको यहां के शिल्पियों, बुनकरों ने बड़े सही करीने से तराशा है। साथ ही 70 साल पुरानी ज़रदोज़ी की कलात्मक लाल रंग की पिछोई भी दिखाया गया। इस स्टाल पर प्रधानमंत्री कुछ देर रुके और कला की बारीकियों को सराहा। कैसर जहां के गाजीपुर वाल हैंगिंग के करघे को देख कर कहे कि "वाह, छोटा सा छोरा लगा लिया करघा" तो गुलाबी मीनकारी की निकिता सिंह से पढ़ाई के बारे में भी बात की और रामनगर के स्टोन जाली क्राफ्ट शिल्पी बच्चा लाल मौर्या ने जब ग्लोब के अंदर गणेश जी की प्रतिमा को दिखाया तो वह रुक कर उसकी बारीकियों को देखने लगे।

डॉ रजनी कांत बताते है कि पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा जब प्रधानमंत्री जी ने स्वयं कहा कि इस क्षेत्र में 10 जी आई ( जियोग्राफिक्ल इंडिकेशन ) पूरी दुनिया के लोगो को आकर्षित कर रही है और यहां के शिल्प विरासत को संरक्षित कर के आगे बढ़ा रही है।