वाराणसी. वरुणा के बढ़ते जलस्तर के चलते वरुणा कॉरीडोर का निर्माणाधीन हिस्सा डूब गया है। चौकाघाट के पास प्रोजेक्ट की बर्बादी साफ दिख रही है। कॉरीडोर के एक हिस्सा पानी में डूब गया है जबकि पुल की दूसरी तरफ देखे तो एक बड़ा हिस्सा बहने के कगार पर पहुंच गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार में भी वरुणा कॉरीडोर के निर्माण को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
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अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा वरुणा कॉरीडोर 2017 से ही विवादों में आ गया है। यूपी चुनाव के बाद ही आयी पहली बाढ़ में वरुणा कॉरीडोर डूब गया था जिसमे लाखों का नुकसान हुआ था उसके बाद से ही योजना पर सवाल उठ रहे हैं। योजना बनाते समय अधिकतम जलस्तर का ध्यान रखा गया था लेकिन बाढ़ ने योजना पर पानी फेर दिया था। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए कई अधिकारियों को निलंबित किया था और कार्यदायी संस्था पर भी दबाव बनाया हुआ था। जिसके चलते कभी तेज तो कभी धीमी गति से काम चलता रहा। पहाड़ों पर हो रही झमाझम बारिश के चलते गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है उसका असर वरुणा नदी पर भी पड़ा है और वरुणा कॉरीडोर का एक हिस्सा पानी में डूब गया। इससे मिट्टी का बह कर नदी में जाने की आशंका हो गयी है जिस तरह से वरुणा में जलस्तर बढ़ रहा है उससे पूरे वरुणा कॉरीडोर के ही डूबने की संभावना बन गयी है।
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201 करोड़ की लागत से बनना है वरुणा कॉरीडोर
अखिलेश यादव ने पीएम नरेन्द्र मोदी की नमामी गंगे योजना को जवाब देने के लिए ही बनारस में वरुणा कॉरीडोर प्रोजेक्ट को चालू कराया था। 201 करोड़ की येाजना के तहत 10 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर सुन्दरीकरण का काम चल रहा है। वरुणा नदी की गहराई बढ़ाने के साथ दोनों तरफ पाथ वे, पौधे लगाने, लाइटिंग आदि का काम होना है लेकिन घोटाले की भेंट चढ़ी इस योजना के डूब जाने से समय से पूर्ण होने की संभावना खत्म हो गयी है। बड़ा सवाल है कि ऐसी ही बाढ़ हर साल आती रही तो कॉरीडोर के औचित्य पर ही सवाल खड़ा हो जायेगा।
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