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वाराणसी. वट सावित्री व्रत का बहुत महत्व है। इस व्रत को करने से पति की आयु लम्बी होती है साथ ही सास-ससुर को सुख की प्राप्ति मिलती है और संतान का भविष्य उज्जवल होता है। यह व्रत ज्येष्ठ माह की अमास्या को रखा जाता है। वर पूजा के दिन सभी सुहागिन और सौभाग्यवती स्त्रियां वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ का पूजन करती हैं और उसकी परिक्रमा लगाती हैं। इस बार यह त्योहार तीन जून को पड़ रहा है।
वट सावित्री व्रत और पूजा का महत्व
यह व्रत सुहागिनों के लिए बहुत खास महत्व रखता है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने सुखद वैवाहिक जीवन और संतान के कल्याण के लिए वट वृक्ष का पूजन करती हैं। माना जाता है कि ज्येष्ठ माह अमावस्या के दिन सावित्री नामक स्त्री ने यमराज से अपने सुहाग सत्यवान के प्राण वापस ले आई थी। तभी से इस व्रत को पति की लम्बी आयु के लिए रखा जाने लगा। इस व्रत में वट वृक्ष का महत्व बहुत खास होता है।
वट सावित्री पूजा का शुभ मुहूर्त
यह पूजा अगर शुभ मुहूर्त पर की जाय तो इसका फल बहुत अच्छा होता है। इस बार यह व्रत 3 जून 2019 सोमवार को है। इसका शुभ मुहूर्त सोमवार के प्रात: काल से लेकर शाम 03.31 तक है।
चना चढ़ाने का है यह महत्व
वैसे तो ज्योतिष शास्त्र में इस व्रत की खास विधि आदि वर्णित की गई है। लेकिन इसके अलावा भी वट सावित्री के पूजन में एक चीज करना बहुत आवश्यक है। बताया जाता है कि इस व्रत की पूजा में भीगे हुए चने अर्पण करने का बहुत महत्व है, क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार यमराज ने चने के रूप में ही सत्यवान के प्राण सावित्री को दिए थे। सावित्री चने को लेकर सत्यवान के शव के पास आई और चने को सत्यवान के मुख में रख दिया, इससे सत्यवान पुन: जीवित हो गए।
Updated on:
02 Jun 2019 03:40 pm
Published on:
02 Jun 2019 03:38 pm
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