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World Music Day 2018- जर्मनी के हनोवर में गूंजा काशी का सरोद, बनारस घराने के संगीत से सराबोर हुए श्रोता

विश्व संगीत दिवस पर 25 देशों के कलाकारों ने अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व किया, भारत का मान ऊंचा किया बनारस के विकास महाराज ने।

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विश्व संगीत समारोह के मौके पर हेनोवर में सरोद वादक विकास महाराज की प्रस्तुति

विश्व संगीत समारोह के मौके पर हेनोवर में सरोद वादक विकास महाराज की प्रस्तुति

डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी


वाराणसी. नृत्य, संगीत की बात हो और बनारस घराने का नाम न आए ऐसा संभव ही नहीं है। तभी तो बनारस को देश की सांस्कृतिक राजधानी का दर्जा मिला है। लेकिन बनारस घराने के संगीत का परचम तो पूरी दुनिया में लहरा रहा है। उसी कड़ी को आगे बढाया प्रसिद्ध सरोद वादक विकास महाराज और उनके बेटों नेष मौका था विश्व संगीत दिवस का। यूनेस्को city of music at fête de la musique, Hannover के मौके पर यूं तो दुनिया के 25 देशों के संगीतकारों ने अपनी प्रस्तुति दी पर महफिल लूटी बनारस के सरोद वादक विकास महाराज और उनके बेटों ने।

हेनोवर से पत्रिका को दी जानकारी में पंडित विकास महाराज ने बताया कि विश्व संगीत दिवस के उपलक्ष पर यूनेस्को city of music at fête de la musique, Hannover आयोजन के अंतर्गत 25 देशों के कलाकारों ने अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व किया । भारत से मैने, अपने बेटों प्रभाष महाराज (तबला) और अभिषेक महाराज (सितार) के साथ अपने सरोद वादन से सम्पूर्ण भारत एवं काशी का मान बढ़ाया। वहां मौजूद दर्शक सरोद के साथ तबला और सितार की जुगलबंदी में ऐसे लीन हुए कि पूछें नहीं। स्वर, ताल और बंदिश के तालमेल का जादू श्रोताओं के सिर चढ़ कर बोल रहा था। रह-रह कर सभागार तालियों से गूंजता रहा।
इस मौके पर यश भारती सम्मानित पंडित विकास महाराज ने सर्वप्रथम महात्मा गांधी जी के धुन "वैष्णव जन तो..." से अपने सरोद वादन की शुरुआत की, चूंकि सन 2015 में इसी जगह भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महात्मा गांधी जी की प्रतिमा का अनावरण किया था । तत्पश्चात काशी को समर्पित अपने विश्वविख्यात धुन "गंगा" से पूरे महोत्सव को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके बात राग बागेश्री, एवं पुरियाधनाश्री की अवतरणा की। आपके साथ मंच पर अभिषेक महाराज ने सितार एवं तबले पर प्रभाष महाराज ने संगत की।

कार्यक्रम के दौरान भारी संख्या में भारतीय नागरिक एवं भारत के वरिष्ठ राजनयिक मदन लाल रायगर भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम के पश्चात पंडित विकास महाराज जी एवं पुत्र द्वय को सम्मानित किया और इस मौके पर हेनोवर आ कर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए आभार जताया।

बता दें कि पत्रिका ने सबसे पहल 30 मार्च को अपने पाठकों को यह जानकारी देते हुए बताया था कि 21 जून 2018 को जर्मनी के हनोवर (Hannover) शहर में विश्व संगीत दिवस (Fete de la musique) के उपलक्ष्य पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए बनारस से सरोद वादक पंडित विकास महाराज को आमंत्रित किया गया है। यह जानकारी तब भी विकास महारा ने ही पत्रिका को दी थी। उन्होंने बतया था कि Fete de La musique की स्थापना फ्रांस के सांस्कृतिक मंत्री जैक लांग (Jack Lang) ने की थी। विश्व प्रसिद्ध संगीत के त्यौहार को सर्वप्रथम सन 1982 में फ्रांस में मनाया गया था। भारतीय दूतावास जर्मनी से आए निमंत्रण पर पंडित जी ने ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार एवं प्रदेश की जनता को हार्दिक बधाई एवं धन्यवाद दिया था। पंडित विकास महाराज ने कहा था कि इस सम्मानित संगीत महाकुम्भ में भारत के लिए सरोद वादन करना मेरे लिए गर्व की बात है।

यहां यह भी बता दें कि पंडित विकास महाराज को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यश भारती से सम्मान से नवाजा जा चुका है। सरोद वादक पं. विकास महाराज को यूनेस्को की सदस्यता भी मिली है। बनारस घराने के विश्व स्तरीय कलाकार को वर्ल्ड हेरिटेज कन्वेंशन श्रेणी में स्थान दिया गया है। यूनेस्को की ओर से बनारस को सिटी ऑफ म्यूजिक घोषित किए जाने के बाद इस कदम को काशी के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया है। न्यूजीलैंड पार्लियामेंट में सम्मान के साथ ही उन्हें 1995 में जर्मनी की ओर से सांस्कृतिक संबंध विस्तार के लिए प्रोफेसर की उपाधि से नवाजा जा चुका है। नई उपलब्धि से उत्साहित पं. विकास महाराज का मानना है कि इस प्रोत्साहन से सांगीतिक गतिविधियों के साथ सामाजिक कार्यों में भी तेजी आएगी और बनारस घराने को विश्व पटल पर ख्याति अर्जित होगी। वैसे पंडित जी को 2017 में ब्रुनेई के सुल्तान हसन अल बोल्कियाह का निमत्रण भी प्राप्त हो चुका है।

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