
अपना कॅरिअर बनाने और भागमभाग वाली जीवनशैली के चलते युवाओं में मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में पत्रिका उत्तर प्रदेश ने मनोवैज्ञानिक से इससे बचाव करने के तरीकों पर चर्चा की। आज के समय में युवाओं में मानसिक तनाव काफी ज्यादा बढ़ रहा है। इसका कारण हर कोई अलग- अलग बताता है, लेकिन मनोवैज्ञानिक इसका कुछ अलग ही कारण बताते है। हमने बीएचयू के मनोवैज्ञानिक से खास बातचीत की। जिसमे उन्होंने मानसिक तनाव के कारण और निवारण दोनों के बारे में खुल कर बताया। आइए आपको विस्तार से बताते हैं…
युवाओं में लगातार तेजी से बढ़ रहे मानसिक तनाव पर चर्चा करते हुए डॉ. लक्ष्मण बताते हैं कि अवसाद बीमारी नहीं है और इससे पीड़ितों को एक बीमार की तरह ट्रीट नहीं करना चाहिए। हम अवसाद से जूझ रहे लोगों से बस कुछ देर बात करके, उनका हाल-चाल पूछकर उन्हें एक अच्छी मेंटल हेल्थ दे सकते।
मानसिक तनाव क्या होता है?
मानसिक तनाव यह डिप्रेशन एक प्रकार का मानसिक विकार है। किसी भी एक नकारात्मक विचार के दिमाग़ पर हावी हो जाने के बाद हमारी मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है। हमारा मस्तिष्क सही से कार्य करने और किसी भी ख़ुशी के मौक़े प्रसन्न होने में असक्षम हो जाता है। यह तनाव की स्थिति कही जा सकती है। कुछ लोगों में तनाव की खास वजह होती है और कुछ लोगों में कोई खास वजह नहीं भी होती है।
मानसिक तनाव के कारण
रोजमर्रा की जिंदगी हमारी जिंदगी में कभी-कभी कोई ऐसी घटना हो जाती है जिससे हमारी जिंदगी प्रभावित होती है। अपने किसी प्यारे के जिंदगी से चले जाना, तलाक, किसी की नौकरी खत्म हो जाना आदि! ये सब मानसिक तनाव के कारण बन जाते हैं। व्यक्ति इनसे से बाहर नहीं निकल पाता और तनाव का शिकार बन जाता है।
अकेलापन इंसान का अकेले रहना कई बार तनाव का कारण बन जाता है। अगर कोई व्यक्ति अकेला है और उसका कोई दोस्त नहीं है तो वह मानसिक तनाव का शिकार हो सकता है।
शारीरिक बीमारियां किसी भी व्यक्ति को अगर लगातार शारीरिक बीमारी है तो वह मानसिक तनाव का मरीज हो सकता है। यदि किसी को दिल की बीमारी, कैंसर या इस तरह की कोई बीमारी है तो इंसान अपनी बीमारी से परेशान होकर तनाव का शिकार बन जाता है।
पुरानी यादें डिप्रेशन कभी भी किसी को भी हो सकता है परंतु कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनको तनाव जल्दी होने का खतरा होता है। यह उनकी जिंदगी पर निर्भर करता है कि उनकी पुरानी जिंदगी कैसे गुजरी है।
शराब शराबी लोग जो बहुत ज्यादा शराब का सेवन करते हैं वे तनाव के शिकार हो जाते हैं। उनके अंदर खुदकुशी के ख़यालात आते हैं।
घरेलू कलह जब महिलाएँ लंबे समय तक घर में बंद रहती हैं और उन पर अत्याचार किया जाता है तो ऐसे में उन्हें तनाव हो जाता है। शोध में इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि महिलाओं को पुरुषों के मुक़ाबले में अधिक तनाव और मानसिक पीड़ा का अनुभव होता है।
डिप्रेशन की बीमारियां कभी-कभी वंशानुगत होती है। अगर आपके मां-बाप को डिप्रेशन या तनाव की बीमारी है तो आपको भी तनाव का ख़तरा 80% रहता हैं।
मानसिक तनाव से खुद को दूर कैसे करें?
हमें जब भी किसी बात को लेकर टेंशन लगे तो शरीर को एक्टिव करें। गहरी सांस लें, एक्सरसाइज करें या पैदल कुछ दूर चलें। अपनी उपलब्धियों और जिंदगी के सबसे अच्छे वक्त को याद करें। खुद से कंट्रोल नहीं हो रहा हो तो बिना वक्त गवाई किसी थैरेपिस्ट की मदद लें। आपकी यह छोटी मोटी सावधानियां आपके हंसते खेलते जीवन को गुलजार बना देंगी।
कंपटीशन का यह जमाना युवाओं को उबरने नहीं दे रहा तो आइए हम जानते हैं कि इस मानसिक तनाव से खुद को कैसे निकालें और अपने नॉर्मल जीवन में कैसे वापसी करें…
वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय में बतौर मनोचिकित्सक तैनात मनोवैज्ञानिक डॉ लक्ष्मण बताते हैं हमें कुछ विशेष करने की आवश्यकता नहीं है। बस हमे अपने दिनचर्या में कुछ बदलाव करना होगा। समय की बाध्यता से अपने आप को मुक्त करना होगा तभी हमारे मस्तिष्क में नई ऊर्जा का संचार होगा।
हमें बेफिजूल के लग्जरी से खुद को बचाना होगा। दूसरों की उपभोग करने वाली वस्तुओं से अपने मन को हटाना होगा, नहीं तो बार-बार हमारा दिमाग यह याद दिलाता रहेगा कि हम कैसे वह नई नवेली कार खरीद लें।
पर हमारा दिमाग उसके पीछे की वजह को नहीं समझ पाता हम अपने शौक पूरे करने के लिए कार EMI पर ले तो लेते हैं पर समय पर उसकी भरपाई न कर पाने पर उससे उत्पन्न मानसिक तनाव हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत जोखिमभरा होता है।
डॉ लक्ष्मण कहते हैं कि हमें अपनी लाइफ को बैलेंस करके चलना चाहिए, ना ही ज्यादा काम और ना ही ज्यादा आराम...क्योंकि यह दोनों जब हद से ज्यादा होने लगते है तो हमारे लिए एक विकराल स्थिति उत्पन्न कर देते है।
हम अपने जीवन को संतुलित तभी बना सकते हैं जब हमारा लक्ष्य निर्धारित हो और प्रत्येक दिन हम अपने निर्धारित लक्ष्य के लिए मेहनत करें। हमें अपनी अच्छाइयों और बुराइयों को संतुलित रखना चाहिए ना ज्यादा कम ना ज्यादा अधिक। बेवजह ही खुद को किसी ऐसे मामले में नहीं डालना चाहिए जिसकी जानकारी स्पष्ट ना हो नहीं तो आगे चलकर हमारे ये छोटे बड़े फैसले मन मस्तिष्क पर गहरा आघात करते हैं।
रिपोर्ट:- आयुष कुमार दुबे
Published on:
13 Jun 2023 11:24 pm
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