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खान-पान के धंधे में बनारसवालियों की धाक

-काशी के कैटरिंग व्यवसाय में महिलाओं का वर्चस्व 

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Awesh Tiwary

Mar 08, 2016

women caterers from varanasi

women caterers from varanasi

-आवेश तिवारी

वाराणसी-बनारस शहर अपने मंदिरों और गंगा के अलावा अपने खान-पान के लिए देश भर में जाना- जाता है।लेकिन इस शहर की एक खासियत और है यह देश का एकमात्र ऐसा शहर है जो कि अघोषित तौर पर मातृसत्तात्मक है।पुरुषों का काम सिर्फ पैसे कमाना है उसके अलावा रोजमर्रा के वो काम जिन्हें परम्परागत तौर से पुरुष करता आया है स्त्रियाँ कर रही है नतीजा यह है कि बनारस शहर में स्त्रियों के खिलाफ अपराध देश के नया हिस्सों के सापेक्ष बेहद कम होते हैं।फिलहाल हम बनारस की उन महिलाओं की बात कर रहे हैं जिन्होंने कैटरिंग के धंधे पर पुरुषों को जबरदस्त चुनौती दी है।इस वक्त बनारस शहर में तक़रीबन एक हजार महिलाएं ऐसी हैं जो खान-पान के व्यवसाय से जुडी हैं,अब बनारस शहर ही नहीं पूर्वांचल के अन्य जिलों में इन महिलाओं के चर्चे हैं,लोग अब छोटी बड़ी पार्टियों में इन महिला कारीगरों के सेवाएँ ले रहे हैं, अब शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में भी इन बनारसवालियों की सेवाएँ ली जा रही है।

काशी का स्वाद महिलाओं के हाथ

आशा से जब हम पूछते हैं कि इस काम में किस किस्म की दिक्कतें आती है? तो वो मुस्कुराकर कहती है च्च्बस शहर से बाहर का काम मिलता है तो एक बार सोचना पड़ता है लेकिन अब वो भी कर रहे हैं।

समूचे पूर्वांचल में पैर जमा रही महिला कैटरर्स

यही हाल लोहटिया रीता का है 50 साल की रीता की रसोई का स्वाद जिसने एक बार ले लिए वो कहीं और जा ही नहीं सकता।रीता का काम काज आज कई जिलों में पहुँच गया है,रीता आज से 5 साल पहले का वो दिन याद करती है जब उन्होंने 5 बाजार बारातियों का इंतजाम अपने दम पर करके दिखाया था।रीता का कहना है कि उनकी कई शागिर्दों ने भी अपना काम शुरू कर दिया है ,जब हम पूछते हैं कि कैसा लगता है तो वो कहती है महिलायें अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं,यह बड़ी बात है।रीता कहती हैं एक वक्त था जब लोग महिलाओं को काम देने से घबराते थे लेकिन अब समय बदल रहा है।

अन्नपूर्णा के शहर में मिल रहा सम्मान

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