
Cervical Cancer
वाराणसी. सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुख का कैंसर) से बचाव को सबसे ज्यादा जरूरी है कि महिलाएं नियमित तौर पर स्क्रीनिंग कराएं। ठीक उसी तरह से जैसे आम आदमी ब्लड शुगर या रक्तचाप आदि की जांच कराते हैं। स्क्रीनिंग से इस रोग के बारे में प्रारंभिक अवस्था में ही पता चल जाएगा, जिससे समय रहते इलाज हो पाएगा। ये कहना है कि होमी भाभा कैंसर संस्थान की डा. रुचि पाठक का। वो रविवार को सर्किट हाउस में सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग व वैक्सीनेशन पर जागरुकता एवं संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।
सर्वाइकल कैंसर वायरस से होता है जो यौन संक्रमण से फैलता है
डा. पाठक ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुख का कैंसर) एक वायरस के चलते होता है जो यौन संक्रमण के चलते एक से दूसरे तक पहुंचता है। इसका प्रभाव 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में अधिक होता है। संक्रमण का प्रभाव अधिकांशतः कई वर्ष बाद देखने को मिलता है। उन्होंने बताया कि चूकि यह बीमारी यौन संक्रमण के चलते होती है लिहाजा इसके बचाव का एक बड़ा उपाय है कि नौ से 14 वर्ष की किशोरियों को इससे संबंधित टीके की दो डोज जरूर लगवा दी जाए। यह टीका 15 से 26 वर्ष की उम्र में भी लग सकता है लेकिन तब टीके की कुल तीन डोज लगवानी होगी। बताया कि चूंकि यह बीमारी लक्षण विहीन होती है और इससे पीड़ित होने का पता रोगी को बहुत देर में चलता है लिहाजा इससे बचाव के लिए प्रत्येक महिला को अपनी स्क्रीनिंग जरूर करवानी चाहिए ताकि रोग का जरा भी लक्षण नजर आए तो उसका उपचार समय से शुरू किया जा सके।
महिला विद्यालयों की बड़ी भूमिकाः कलेक्टर
इस मौके पर कलेक्टर कौशल राज शर्मा ने महिला विद्यालयों की प्रधानाचार्यो, अध्यापिकाओं से कहा कि इस बारे में वह अपने विद्यालय की छात्राओं व उनके अभिभावकों को जागरूक करें। विद्यालयों के नोटिस बोर्ड पर इस रोग की गंभीरता और बचाव के उपाय के बारे में जानकारी देते हुए इससे सम्बन्धित टीकाकरण और स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी जाए। उन्होंने स्वयं सेवी संस्थाओं से भी अपील किया कि वह भी इस दिशा में सहयोग प्रदान करें।
बेटियों को लगवाएं टीकाः सीडीओ
मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अभिषेक गोयल ने कहा कि जिस तरह हम अन्य बीमारियों के टीके लगवाते है, उसी तरह अगर सर्वाइकल कैंसर का टीका भी अपनी बेटियों को लगवा दें तो उनका जीवन सुरक्षित हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में चलाए जा रहे अभियान में महिला विद्यालय के प्रधानाचार्यो व अध्यापिकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि वे अपनी छात्राओं के साथ-साथ विद्यालय आने वाले उनके अभिभावकों को इस बारे में जागरूक करेंगी तो इसके सार्थक परिणाम आएंगे।
युवतियों- महिलाओं की ज्यादा से ज्यादा हो स्क्रीनिंगः सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संदीप चौधरी ने कहा कि किशोरियों के टीकाकरण के साथ ही युवतियों, महिलाओं की ज्यादा से ज्यादा स्क्रीनिंग के जरिए इस रोग पर अंकुश लगाया जा सकता है। इसकी स्करीनिंग के लिए सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों, हेल्थ एण्ड वेलनेश सेंटर पर सुविधा उपलब्ध है और महिलाएं इसका लाभ उठा सकती है।
हर साल 1.40 लाख महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से हो रहीं पीड़ितः अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. ए.के. मौर्य ने कहा कि देश में प्रतिवर्ष एक लाख 40 हजार से अधिक सर्वाइकल कैंसर पीड़ित मरीज मिल रहें है, इनमें हर वर्ष 25 प्रतिशत को अपनी जान गवांनी पड़ती है। यदि नौ से 14 वर्ष की किशोरियों के टीकाकरण के साथ ही महिलाओं के स्क्रीनिंग पर हम ध्यान दें तो इस रोग पर काफी अंकुश लगाया जा सकता है।
राज्यपाल आनंदी बेन की पहल पर शुरू हुआ अभियान
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की पहल पर रविवार को जिले के महिला विद्यालयों की प्रधानाचार्यो व स्वंय सेवी संस्थाओं के साथ सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुख का कैंसर) के रोकथाम की पर चर्चा की गई। इसमें स्क्रीनिंग, वैक्सीनेशन पर जोर देने और जागरूकता के लिए अभियान चलाने पर मंथन किया गया।
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में डीएचईआईओ हरिवंश यादव, डॉ. अतुल सिंह, डॉ. आरबी यादव, डॉ. यतीश भुवन पाठक, डॉ. मनोज सिंह, डॉ. अमित सिंह, होमी भाभा कैंसर संस्थान की निशा, व आखिलेश तथा जिला विधालय निरीक्षक उपस्थित थें।
Published on:
17 Apr 2022 08:35 pm
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