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…तो महिलाएं इसलिए सावन में पहनती हैं हरी चूड़ियां और हरी साड़ियां

महिलाएं सावन में हरे रंग का ज्यादातर उपयोग करती हैं

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Green bangales

हरी चूड़ियां

वाराणसी. सावन आते ही महिलाओं पर हरे रंग का धुन सवार हो जाता है। अक्सर आपने महिलाओं को हरी चूड़ियां, हरे कपड़े पहनते देखा होगा। महिलाएं सावन में हरे रंग का ज्यादातर उपयोग करती हैं। लेकिन इस हरे रंग को पहनने की खासियत क्या है ये शायद ही उन्हें पता होगा। मैं आपको बताती हूं आखिर ये हरे रंग पहनने का चलन क्यों है।

मिलता है सुहाग के सलामती का आशीर्वाद
महिलाएं सावन में अपने सुहाग के सलामती के लिए हरा रंग पहनती हैं। शास्त्रों में हरे रंग को सौभाग्य का प्रतीक माना गया है और प्रकृति को ईश्वर का रूप माना गया है और इसलिए उसकी पूजा भी की जाती है। इस पूरे महीने हरा पहनने वाले लोगों पर प्रकृति की विशेष कृपा होती है। महिलाएं हरे रंग की चूडि़यां और सुहाग की चीजें पहनकर प्रकृति से खुद को जोड़ती हैं और इस तरह उनके सुहाग की सलामती का उन्हें आर्शीवाद मिलता है। इसलिए शिव पर जल अर्पित कर भी हम खुद को प्रकृति से जोड़ते हैं। इसी तरह इस महीने हरा रंग पहनकर भक्तजन खुद को प्रकृति से जोड़ते हैं, जिसका असर भाग्य पर भी होता है।

धन की होती है बारिश
हरा रंग बुद्ध ग्रह का प्रतीक होता है। बुद्ध ग्रह करियर और व्यापार से जुड़ा हुआ है। ऐसे में हरा रंग पहनने से बुद्ध प्रसन्न होते हैं और सुहागिनों के घर में समपन्नता और धन-धान्य बढ़ाते हैं।

भगवान शिव होते हैं प्रसन्न
सावन में हरा रंग पहनने से शिव खासतौर से खुश होते हैं। भगवान शंकर का प्रकृति से विशेष जुड़ाव है और ऐसे में भक्त जब खुद को प्रकृति के अनुरूप ढाल लेता है तो शिव विशेष तौर से खुश हो जाते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। सावन में हरे रंग चूड़‍ियां पहनने वाली महिलाओं पर विष्णु जी भी प्रसन्न होते हैं।

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