
BHU
वाराणसी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS BHU) के न्यूरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित "न्यूरो इंफेक्शन अपडेट 2022" वर्कशॉप के दूसरे दिन भी देश के नामचीन न्यूरोलॉजिस्ट ने न्यूरो संबंधी बीमारी और उसके उपचार पर मंथन किया। विशेषज्ञ इस पर एक मत रहे कि जितनी तेजी से वायरस बढ़ रहे है उसके लिए निरंतर शोध की जरूरत है। विशेषज्ञों ने भावी चिकित्सकों को कहा की विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों से अपडेट रहना चाहिए। रेजिडेंट चिकित्सकों को सलाह दी कि आप जितना समय मरीजों को देंगे, नए-नए केसेज आपके सामने होंगे। उस मौके पर आप अपने सीनियर और अपने प्रोफेसरों से ज्ञानार्जन कर सकते है।
सिर्फ कुत्तों के काटने से नहीं होता रेबीज
निम्हांस बैंगलोर के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर अनिता महादेवन ने "रेबीज वायरस इंफेलिटिस" पर व्याख्यान दिया।. उन्होंने कहा कि रेबीज केवल कुत्तों के काटने से नहीं होता। इसके कई कारण होते है। यह डायग्नोसिस से ही पता लगाया जा सकता है। इसका मुख्य लक्षण हाइड्रोफोविया (पानी से डर लगना) भी है। इसका पता लगाने के लिए एमआरआई सरल तरीका है, जिसमें नेग्री बॉडी की उपस्थिति से रेबीज वायरस इंफेलिटिस का पहचान किया जाता है।
माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण फैलता है टीबी
इस मौके पर न्यूरोलॉजिस्ट सतीश चंद्र सर, पद्मश्री कामेश्वर प्रसाद सिंह, अनिता महादेवन, जयंती कलिता ने न्यूरो इंफेक्शन संबंधित बीमारियों एवं उनके उपचार के बारे में बताया। साथ ही प्रो मीना गुप्ता ने क्षय रोग यानी टीबी के बारे में बताते हुए बताया कि ये माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण फैलता है, जो अक्सर मनुष्य के फेफड़ों को प्रभावित करता है। टीबी रोग, इलाज योग्य और रोकथाम योग्य है। टीबी हवा के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इसके साथ ही उन्होंने टीबी के प्रकार, लक्षण और उससे बचाव के बारे में बताया।
ये रहे मौजूद
दो दिवसीय कार्यशाला की समाप्ति पर न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो विजयनाथ मिश्र, डॉ कुलवंत सिंह, प्रो आर.एन. चौरसिया, प्रो दीपिका जोशी, डॉ अभिषेक पाठक और डॉ वरुण ने अतिथियों के प्रति आभार जताया।
Published on:
26 Jun 2022 05:13 pm
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