इस मंदिर की आराध्य भारत माता हैं। यहां पर पूजा, कर्मकाण्ड या दूसरे मंदिरों जैसे घंटा घड़ियाल नहीं बजते और न ही पंडितों पुरोहितों की खींचतान होती है। आजादी की लड़ाई के दौर में अपने प्राणों की आहुति देने वालों का प्रेरणा स्रोत यह मंदिर आज भी हिन्दू, मुस्लिम, सिख एवं ईसाई जैसे जाति या साम्प्रदायिक और उन्मादी धार्मिक भावना से कोसों दूर सर्वधर्म समभाव का संदेश दे रहा है।